युवाओं को समाज एवं राष्ट्र निर्माण से जोड़ने का सशक्त माध्यम है माय भारत : डॉ. बिहारी लाल द्विवेदी
सेवाजोहार (डिंडोरी):- भारत सरकार के युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय द्वारा संचालित मेरा युवा भारत के अंतर्गत मेकलसुता महाविद्यालय, डिंडौरी के प्राचार्य डॉ. बिहारी लाल द्विवेदी को जिला माय भारत एंबेसडर का दायित्व सौंपा गया है। जिला युवा अधिकारी श्री भुवन सिंह सोलंकी के मार्गदर्शन में इस अवसर पर माय भारत की गतिविधियों एवं जिले के युवाओं को इससे जोड़ने के संबंध में चर्चा की गई।
डॉ. बिहारी लाल द्विवेदी का शैक्षणिक एवं सामाजिक क्षेत्र में लंबे समय से योगदान रहा है। उन्होंने छात्र जीवन में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के कार्यकर्ता के रूप में सामाजिक गतिविधियों में सहभागिता की तथा NCC से जुड़कर अनुशासन, नेतृत्व एवं राष्ट्रसेवा का अनुभव प्राप्त किया। उन्होंने हिंदी, समाजशास्त्र, संस्कृत एवं विधि ( LL.M ) में स्नातकोत्तर शिक्षा प्राप्त की है तथा वर्तमान में विधि में पीएच.डी. शोधरत हैं। वर्ष 2012 में मेकलसुता महाविद्यालय में समाजशास्त्र के सहायक प्राध्यापक के रूप में कार्यभार ग्रहण करने के बाद वर्तमान में महाविद्यालय के प्राचार्य के रूप में सेवाएं दे रहे हैं।
उन्होंने कहा कि माय भारत केवल खेल गतिविधियों तक सीमित मंच नहीं है, बल्कि युवाओं को शिक्षा, सामाजिक सहभागिता, कौशल, शारीरिक विकास, नेतृत्व एवं रोजगार के विभिन्न अवसरों से जोड़ने वाला व्यापक मंच है।’’ उन्होंने ग्रामीण एवं दूरस्थ क्षेत्रों के युवाओं तक माय भारत की पहुंच बढ़ाने पर विशेष जोर दिया, ताकि शासन की योजनाओं, अवसरों एवं विभिन्न गतिविधियों की जानकारी प्रत्येक युवा तक पहुंच सके।
डॉ. द्विवेदी ने डिजिटल कनेक्टिविटी को युवाओं के आपसी संवाद और नए विचारों के आदान-प्रदान का प्रभावी माध्यम बताते हुए कहा कि युवाओं को समाज एवं राष्ट्र के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को समझते हुए माय भारत से सक्रिय रूप से जुड़ना चाहिए। उन्होंने कहा कि स्व के बारे में न सोचकर ‘हम’ के बारे में सोचना ही जीवन का मूल उद्देश्य होना चाहिए। उन्होंने युवाओं से अधिक से अधिक संख्या में माय भारत से जुड़ने का आह्वान किया। उल्लेखनीय है कि डॉ. द्विवेदी की चार पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं, जिनमें ’दीर्घकालीन भविष्य में अध्यापक शिक्षक की भूमिका-भाग-2, सांस्कृतिक संचेतना, भारतीय ज्ञान परंपरा के वैश्विक परिप्रेक्ष्य’ तथा ’भारतीय सामाजिक न्याय: समावेशी विकास’ शामिल हैं।