सेवाजोहार (डिंडोरी):- जिले में धान की फसल में भूरा एवं सफेद फुदका के प्रकोप को देखते हुए कृषि विभाग ने किसानों को फसल की नियमित निगरानी करने और कीट का प्रकोप दिखाई देने पर समय रहते नियंत्रण के उपाय अपनाने की सलाह दी है।
कृषि विभाग के अनुसार फुदका के प्रकोप से धान की पत्तियां पीली पड़ने लगती हैं तथा पौधों की वृद्धि प्रभावित हो सकती है। ऐसे में किसानों को खेतों का नियमित निरीक्षण कर प्रारंभिक अवस्था में ही आवश्यक उपाय करने चाहिए।
अनुशंसित कीटनाशकों का करें उपयोग
कृषि विभाग ने फुदका का प्रकोप दिखाई देने पर निम्न में से किसी एक कीटनाशक का अनुशंसित मात्रा में 150 से 200 लीटर पानी में घोल तैयार कर प्रति एकड़ छिड़काव करने की सलाह दी है—
इमिडाक्लोप्रिड 17.8 एसएल – 60 मिली प्रति एकड़
थायोमेथोक्साम 25 प्रतिशत डब्ल्यूजी – 80 ग्राम प्रति एकड़
पायमेट्रोजिन 50 प्रतिशत डब्ल्यूजी – 120 ग्राम प्रति एकड़
यूरिया के अनावश्यक प्रयोग से बचें
विभाग ने किसानों को सलाह दी है कि फुदका के प्रकोप के दौरान नाइट्रोजनयुक्त उर्वरकों, विशेषकर यूरिया का अनावश्यक उपयोग न करें। कीटनाशक का छिड़काव करते समय खेत में पानी का स्तर कम रखें और स्प्रे को पौधे के निचले तने तथा पत्तियों के आधार तक पहुंचाएं, क्योंकि फुदका सामान्यतः पौधे के इसी हिस्से में पाया जाता है।
एक ही रासायनिक समूह की दवा बार-बार न डालें
कृषि विभाग ने किसानों से कीटनाशकों के प्रयोग में सावधानी बरतने की अपील की है। एक ही रासायनिक समूह की दवा का बार-बार उपयोग करने से कीटों में दवा के प्रति प्रतिरोधक क्षमता विकसित होने की संभावना रहती है। इसलिए कीट नियंत्रण के लिए अनुशंसित दवाओं का उपयोग कृषि विभाग की सलाह के अनुसार किया जाना चाहिए।
कृषि विभाग ने किसानों से अपील की है कि वे धान की फसल की नियमित निगरानी करें और भूरा अथवा सफेद फुदका का प्रकोप दिखाई देने पर समय रहते आवश्यक नियंत्रण उपाय अपनाएं, ताकि फसल को होने वाले नुकसान को कम किया जा सके।