सेवाजोहार (डिंडोरी):- देश भर में राष्ट्रीय हथकरघा दिवस मनाया जा रहा है, इसी क्रम में कलेक्टर विकास मिश्रा के निर्देशन में जिले में हथकरघा दिवस कार्यक्रम का आयोजन कारोपानी में आयोजित हुआ। इस कार्यक्रम में संयुक्त कलेक्टर भारती मेरावी, जिला योजना अधिकारी ओ.पी. सिरसे, स्व-सहायता समूह की दीदी और छात्र-छात्राएं शामिल रहे।
जिले में चल चरखा महिला प्रशिक्षण एवं रोजगार केन्द्र, कारोपानी में हथकरघा के माध्यम से कपड़े का निर्माण किया जा रहा है, केंद्र में आज हथकरघा दिवस का आयोजन किया गया जिसके तहत केंद्रीय विद्यालय और नवोदय विद्यालय के छात्रों ने केंद्र की दीदीयों के साथ हथकरघा दिवस मनाया, छात्रों ने केंद्र में कपड़ा निर्माण प्रक्रिया, चरखा से धागा निर्माण प्रणाली आदि गतिविधियों को समझा, केंद्र की दीदीयों का सम्मान छात्रों ने हस्तलिखित ग्रीटिंग के माध्यम से किया, छात्रों ने दीदियों के लिए घर से लाये भोजन को परोसा और साथ में भोजन किया। केंद्र में छात्रों ने हथकरघा उद्योग की बारीकियों को समझा और स्वदेशी के महत्व को जाना। जिला प्रशासन की ओर से केंद्र की दीदीयों का स्वास्थ्य परीक्षण करवाया गया साथ ही जिला पंचायत कार्यालय द्वारा केंद्र की सभी दीदीयों का सर्वे करवाया गया जिसमें सभी दीदीयों से उनको प्राप्त सरकारी योजनाओं की जानकारी ली गयी, जिन भी दीदीयों को सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है, उन्हें पात्रता अनुसार योजनाओं में शामिल करने के लिया सूचीबद्ध किया।
चल चरखा महिला प्रशिक्षण एवं रोजगार केंद्र, कारोपानी की स्थापना 18 अप्रैल 2018 में आचार्य श्री विद्यासागर जी के मार्गदर्शन में प्रारंभ हुआ, यह केंद्र स्वसहायता समूह के रूप में कार्य करता है, देशभर में 11 चल चरखा केंद्र संचालित है जिनमें से एक केंद्र तिहाड़ जेल दिल्ली में संचालित है मध्य प्रदेश में डिंडोरी के अलावा जबलपुर,इंदौर, सागर में चल चरखा केंद्र चलाये जा रहे है।
चल चरखा केंद्र के माध्यम से स्वरोजगार को प्रेरित किया जा रहा है, जिसमें सिलाई, कढ़ाई का कोर्स प्रशिक्षण और रोजगार उपलब्ध कराया जा रहा है, केंद्र में आरी – जरदोजी का कार्य भी किया जा रहा है। 9 अम्बर चरखा और 9 हथकरघा से प्रारम्भ कारोपानी केंद्र में आज 135 हथकरघा और 40 अम्बर चरखा का संचालन 250 दीदीयां कर रही है। केंद्र में कोईभी महिला जुड़ सकती है, जिन्हें प्रारंभ के 15 दिन में प्रशिक्षण दिया जाता है। दीदीयों को लाभ निर्माण कार्य के आधार पर प्राप्त होता है।
दीदीयों के जीवन में चल चरखा केंद्र ने आर्थिक के साथ साथ सामाजिक जीवन में भी परिवर्तन लाने का कार्य किया है। केंद्र में 6 साल से कार्यरत पुष्पलता नागेश बताती हैं कि पहले वे आर्थिक तंगी से परेशान थी, केंद्र से जुड़ने के बाद उनको आर्थिक रूप से कोई परेशानी नहीं है, वहीं सामाजिक रूप से रहन सहन का तरीका, बोल चाल सभी में सकारात्मक परिवर्तन आया है आज वे आत्मनिर्भरता के साथ सम्मान का जीवन जी रही है।
केंद्र में कार्यरत पिंडुरूखी ग्राम की निवासी नीलम दीदी भी आर्थिक और सामाजिक रूप से सशक्त हुई है, मुकबधिर और श्रवणबाधित होने को अपनी कमजोरी ना मानते हुए नीलम दीदी केंद्र के माध्यम से सम्मान का जीवनयापन कर रही है।