Wednesday, October 28, 2026

डिंडौरी में किसानों की समस्याओं पर बड़ा मंथन, 43 सूत्रीय मांगों से विभागों का ध्यान खींचा

धान की फसल के नुकसान का सर्वे, उपार्जन सीमा बढ़ाने, बिजली-पानी की समस्या दूर करने और नहरों की मरम्मत सहित विभिन्न मुद्दों पर कलेक्टर के समक्ष रखे प्रस्ताव

सेवाजोहार (डिंडोरी):- भारतीय किसान संघ महाकौशल प्रांत, जिला डिंडौरी के प्रतिनिधिमंडल ने मंगलवार को कलेक्टर डिंडौरी एवं संबंधित विभागों के अधिकारियों के साथ बैठक कर किसानों की समस्याओं और कृषि क्षेत्र से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की। बैठक में कृषि, उद्यानिकी, पशुपालन, विद्युत, जल संसाधन, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति, सहकारिता, मत्स्य, कृषि उपज मंडी, वन और नापतौल विभाग सहित विभिन्न विभागों से संबंधित मांगें रखी गईं।

भारतीय किसान संघ ने रबी सीजन के लिए समय पर बीज वितरण, धान की फसल में बीमारी और कम बारिश से हुए नुकसान का सर्वे कर मुआवजा देने, फसल बीमा राशि का भुगतान कराने, धान एवं गेहूं के उपार्जन की सीमा बढ़ाने, सिंचाई व्यवस्था दुरुस्त करने और किसानों को निर्बाध बिजली उपलब्ध कराने जैसे महत्वपूर्ण विषय उठाए। संघ ने कहा कि किसानों की समस्याओं के समाधान के लिए विभागीय स्तर पर ठोस पहल और प्रभावी निगरानी जरूरी है।

कृषि विभाग से संबंधित प्रमुख मांगें

भारतीय किसान संघ ने मांग की कि किसानों को रबी फसलों के बीज समय पर उपलब्ध कराए जाएं। विकासखंड स्तरीय कार्यालयों में बीज एवं अन्य सामग्री की दर सूची, योजनाओं के नाम तथा योजनाओं से लाभान्वित होने वाले संभावित किसानों की जानकारी सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित की जाए। पूर्व बैठकों में उठाए गए इन मुद्दों पर भी कार्रवाई की मांग की गई। संघ ने बताया कि जिले में कम बारिश और फसल में बीमारियों के कारण धान की फसल को नुकसान हुआ है। प्रभावित किसानों की फसलों का सर्वे कराकर नियमानुसार क्षतिपूर्ति तथा फसल बीमा कराने वाले किसानों को बीमा राशि दिलाने की मांग की गई। धान की फसल में फुदका कीट के प्रकोप को लेकर कृषि विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए गए। संघ का कहना है कि समय पर कीट नियंत्रण के लिए आवश्यक मार्गदर्शन और उपचार उपलब्ध नहीं होने तथा कीटनाशक दुकानों की निगरानी में कमी के कारण किसानों को नुकसान उठाना पड़ा। संघ ने कीटनाशक विक्रेताओं की दुकानों का नियमित निरीक्षण करने और किसानों को उचित दवाइयां उपलब्ध कराने की मांग की।

इसके साथ ही धान का उपार्जन प्रति हेक्टेयर 22 क्विंटल से बढ़ाकर 40 क्विंटल तथा गेहूं का उपार्जन 18 क्विंटल से बढ़ाकर 35 क्विंटल करने की मांग दोहराई गई। संघ ने कहा कि यह मांग पिछले तीन वर्षों से उठाई जा रही है। फसल कटाई प्रयोग की सूचना भारतीय किसान संघ को देने, बीज वितरण की अनुदान राशि किसानों के खातों में तत्काल जमा कराने तथा संबंधित सूची सार्वजनिक करने की मांग भी रखी गई। इसके अतिरिक्त जिला, राज्य और अंतरराज्यीय कृषक भ्रमण कार्यक्रमों की जानकारी 15 दिन पहले सार्वजनिक करने और विकासखंड एवं जिला स्तरीय किसान कल्याण सलाहकार समितियों में संघ के प्रतिनिधियों को शामिल करने की मांग की गई।

कृषि अनुसंधान केंद्र की गतिविधियों में पारदर्शिता की मांग

कृषि अनुसंधान केंद्र में किन-किन फसलों एवं बीजों पर अनुसंधान किया जा रहा है, किन गांवों को गोद लिया गया है और वहां किन बीजों का प्रयोग किया जा रहा है, इसकी जानकारी उपलब्ध कराने की मांग की गई। अनुसंधान कार्यक्रमों के लिए किसानों का चयन किस प्रक्रिया के तहत किया जाता है, इसे भी स्पष्ट करने की बात कही गई।

उद्यानिकी विभाग की योजनाओं का लक्ष्य बढ़ाने पर जोर

उद्यानिकी विभाग के अंतर्गत स्थायी ढांचा, फेंसिंग तार, पावर टिलर और अन्य योजनाओं का लक्ष्य बढ़ाने की मांग की गई। संघ ने इन योजनाओं का लाभ अधिक से अधिक किसानों तक पहुंचाने तथा कृषक भ्रमण कार्यक्रमों की जानकारी 15 दिन पूर्व सार्वजनिक करने की आवश्यकता बताई।

पशुओं के उपचार, टीकाकरण और बीमा की मांग

पशु चिकित्सा विभाग में दवाइयों की उपलब्धता सुनिश्चित करने और पशुओं का समय पर उपचार कराने की मांग उठाई गई। जिले में पशु टीकाकरण समय पर कराने तथा सभी पशु चिकित्सा केंद्रों और चलित पशु चिकित्सा वाहनों में रेबीज के इंजेक्शन उपलब्ध कराने की बात कही गई। संघ ने जिला कार्यालय में संलग्न फील्ड अधिकारियों को वापस मैदानी कार्य में भेजने, विभागीय योजनाओं का दीवार लेखन के माध्यम से प्रचार-प्रसार करने और पशुओं का बीमा कराने की मांग भी रखी, ताकि पशुपालकों को योजनाओं का लाभ मिल सके।

बिजली समस्या दूर करने और शहपुरा सब स्टेशन शीघ्र शुरू करने की मांग

विद्युत विभाग से संबंधित मुद्दों में कम वोल्टेज की समस्या प्रमुखता से उठाई गई। संघ ने मांग की कि संबंधित योजना के तहत सर्वे कराकर कम क्षमता वाले ट्रांसफार्मरों को आवश्यकता के अनुसार अधिक क्षमता वाले ट्रांसफार्मरों से बदला जाए। ग्रामीण क्षेत्रों में जर्जर विद्युत लाइनों को भी दुरुस्त किया जाए। शहपुरा में प्रस्तावित 132 केवी सब स्टेशन के शुरू होने की समय-सीमा स्पष्ट करने की मांग की गई। मुख्यमंत्री की घोषणा के अनुसार किसानों को पांच रुपये में बिजली कनेक्शन उपलब्ध कराने तथा स्टाम्प शुल्क हटाने का मुद्दा भी उठाया गया। संघ ने अस्थायी पंप कनेक्शनों में विद्युत पोल से जलस्रोत तक अधिक दूरी होने पर सर्वे कराकर लाइन पहुंचाने तथा नदी, नाले और नहरों के किनारे उपलब्ध पोलों के आधार पर स्थायी कनेक्शन देने की मांग की। शहपुरा और मेंहदवानी क्षेत्र में बार-बार बिजली बंद होने की समस्या का स्थायी समाधान करने तथा विद्युत फॉल्ट को समय पर ठीक कर पर्याप्त बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया।

क्षतिग्रस्त नहरों की मरम्मत कर खेतों तक पहुंचाया जाए पानी

जल संसाधन विभाग के समक्ष जिले में निर्मित 97 बांधों से 291 गांवों तक सिंचाई सुविधा पहुंचाने की योजना का मुद्दा रखा गया। संघ के अनुसार, कई स्थानों पर नहरें क्षतिग्रस्त होने के कारण किसानों के खेतों तक पानी नहीं पहुंच पा रहा है। ऐसी नहरों की मरम्मत कर सिंचाई व्यवस्था बहाल करने की मांग की गई। मोहदा जलाशय की नहर का मरम्मत कार्य कराने तथा किवटी तक नहर का विस्तार करने की मांग भी रखी गई, जिससे क्षेत्र के किसानों को सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी मिल सके।

जल जीवन मिशन की गुणवत्ता पर सवाल

लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के अंतर्गत जल जीवन मिशन की नल-जल योजनाओं के गुणवत्ताहीन कार्यों का मुद्दा उठाया गया। संघ ने बताया कि पंचायतों को हस्तांतरित किए जाने के तीन-चार महीने बाद ही कई योजनाएं बंद हो जाती हैं। इसके उदाहरण के तौर पर जनपद पंचायत अमरपुर के सामर मोहगांव, जनपद पंचायत समनापुर के मोहदा, किवटी और पड़रिया तथा जनपद पंचायत शहपुरा के ढोंढ़ा और चंदवाही सहित अन्य गांवों का उल्लेख किया गया। संघ ने नल-जल योजनाओं में विद्युत कार्य और ट्रांसफार्मर की गुणवत्ता सुनिश्चित करने की मांग की। बताया गया कि कुछ स्थानों पर दो-तीन महीने में ही ट्रांसफार्मर खराब हो जाने से पेयजल आपूर्ति प्रभावित होती है। विभागीय निगरानी और गुणवत्ता परीक्षण की व्यवस्था मजबूत करने पर जोर दिया गया।

धान खरीदी में परिवहन और तौल व्यवस्था सुधारने की मांग

जिला आपूर्ति विभाग से धान खरीदी केंद्रों पर वारदाना और परिवहन की पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की गई, ताकि किसानों को उपज बेचने में परेशानी न हो। धान खरीदी के दौरान धर्मकांटों की जांच कराने का मुद्दा भी उठाया गया। संघ ने कहा कि अलग-अलग धर्मकांटों पर तौल में अंतर की शिकायतों को देखते हुए सभी धर्मकांटों और खरीदी केंद्रों में उपलब्ध तौल उपकरणों की जांच की जानी चाहिए। इसके अतिरिक्त गोदाम स्तरीय खरीदी के दौरान गोदाम प्रभारियों द्वारा दोबारा तौल कराने की व्यवस्था में सुधार करने की मांग की गई, जिससे किसानों को अनावश्यक परेशानी से बचाया जा सके।

सहकारी बैंक और समितियों में पारदर्शिता की मांग

सहकारी बैंक से संबंधित मुद्दे पर संघ ने कहा कि ऋण की राशि जमा करने के लिए किसानों को लैम्प्स भेजे जाने से असुविधा होती है। किसानों की सुविधा के अनुसार बैंक में ही ऋण जमा करने की व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की गई। पड़रिया कला लैम्प्स में किसान क्रेडिट कार्ड बनाने के नाम पर निर्धारित राशि से अधिक पैसा लेने और रसीद नहीं देने की शिकायत की जांच कर व्यवस्था सुधारने की मांग रखी गई। सहकारी समितियों की वार्षिक ऑडिट रिपोर्ट में कितनी समितियों पर आपत्तियां आई हैं, इसकी सूची उपलब्ध कराने तथा बिना टोकन उर्वरक वितरण की शिकायतों की जांच करने की मांग भी की गई। संघ ने स्टॉक पंजी, टोकन और निर्धारित दर सूची का मिलान कर पारदर्शिता सुनिश्चित करने पर जोर दिया।

मंडी में रेट सूची लगाने और किसानों को उचित मूल्य दिलाने की मांग

कृषि उपज मंडी विभाग के समक्ष लाइसेंसधारी गल्ला व्यापारियों द्वारा रेट सूची प्रदर्शित नहीं किए जाने का मुद्दा उठाया गया। संघ ने सवाल किया कि निर्धारित दर सूची नहीं लगाने वाले व्यापारियों पर कार्रवाई क्यों नहीं की जाती। किसानों को उचित मूल्य और पारदर्शी व्यापार व्यवस्था उपलब्ध कराने की मांग की गई। साथ ही, सड़क किनारे और अन्य स्थानों पर खरीदी करने वाले लाइसेंसधारी व्यापारियों को कृषि उपज मंडी परिसर में अस्थायी स्थान उपलब्ध कराने का प्रस्ताव रखा गया, ताकि खरीदी व्यवस्था व्यवस्थित हो सके।

वन्यजीवों से फसल नुकसान पर मुआवजा और फेंसिंग अनुदान की मांग

वन विभाग से जंगली जानवरों और आवारा पशुओं के कारण फसलों को होने वाले नुकसान की क्षतिपूर्ति देने की मांग की गई। किसानों के खेतों की सुरक्षा के लिए फेंसिंग लगाने पर 80 प्रतिशत अनुदान उपलब्ध कराने की मांग भी बैठक में रखी गई।

मत्स्य योजनाओं का प्रचार-प्रसार कराया जाए

मत्स्य विभाग से वर्तमान में संचालित योजनाओं और आगामी योजनाओं की जानकारी सार्वजनिक करने तथा गांव-गांव तक प्रचार-प्रसार कराने की मांग की गई, ताकि पात्र हितग्राही योजनाओं का लाभ ले सकें।

डिंडौरी में कृषि महाविद्यालय खोलने की मांग

भारतीय किसान संघ ने कृषि विज्ञान केंद्र, डिंडौरी में कृषि महाविद्यालय खोलने की मांग रखी। संघ का कहना है कि जिले में कृषि क्षेत्र में पढ़ाई करने वाले विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा के लिए बाहर जाना पड़ता है। स्थानीय स्तर पर कृषि महाविद्यालय खुलने से विद्यार्थियों को जिले में ही अध्ययन की सुविधा मिल सकेगी और कृषि शिक्षा को बढ़ावा मिलेगा।

किसानों के हित में मांगों पर ठोस कार्रवाई की अपेक्षा

बैठक में भारतीय किसान संघ ने विभिन्न विभागों से संबंधित समस्याओं को प्राथमिकता के आधार पर हल करने, पूर्व बैठकों में रखे गए मुद्दों पर हुई कार्रवाई की जानकारी उपलब्ध कराने और योजनाओं के क्रियान्वयन में पारदर्शिता सुनिश्चित करने पर जोर दिया। संघ की प्रमुख मांगों में समय पर कृषि सामग्री उपलब्ध कराना, फसल नुकसान का उचित आकलन, सिंचाई एवं विद्युत सुविधाओं में सुधार, सरकारी योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन, खरीदी केंद्रों पर पारदर्शी व्यवस्था और सहकारी संस्थाओं की जवाबदेही सुनिश्चित करना शामिल रहा। अब किसानों की निगाहें इस बात पर रहेंगी कि बैठक में उठाए गए मुद्दों पर संबंधित विभाग किस तरह कार्रवाई करते हैं और समस्याओं का समाधान कितनी समय-सीमा में किया जाता है।

इस कार्यक्रम मे जिलाध्यक्ष बिहारी लाल साहू, जिला जैविक प्रमुख तरुण परस्ते, जिला विपणन प्रमुख खिलपत गौतम, डिण्डौरी तहसील अध्यक्ष खमोद चंदेल, रमेश चौहान, द्वारका ठाकुर,तुलसीराम राजपूत, गणेश गौतम, बजाग तहसील अध्यक्ष आशाराम यादव, शहपुरा प्रचार प्रमुख कृष्ण कुमार साहू, सदस्य मटरू दादा, संतोष झारिया,प्रेम सिंह धुर्वे, अमृत सिंह परस्ते, दुर्गेश कुमार झारिया, महिला संयोजिका अमरपुर सुशीला धुर्वे, तारा भवेदी, सुनीता धुर्वे आदि रहे उपस्थित।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Advertisement
Market Updates
Rashifal
Live Cricket Score
Weather Forecast
Weather Data Source: Wettervorhersage 14 tage
Latest news
अन्य खबरे