Thursday, January 15, 2026

पेड़ है तो पानी है, पानी है तो जिंदगानी है : उजियारो बाई की सफलता की कहानी

17 से 20 सितंबर 2024 तक नई दिल्ली हो रहा 8वें भारत जल सप्ताह का आयोजन
“समावेशी जल विकास और प्रबंधन के लिए भागीदारी और सहयोग“ विषय पर राष्ट्रपति के सामने उजियारो बाई ने सुनाई अपने संघर्ष की कहानी
सेवाजोहार (डिंडोरी):- 17 से 20 सितंबर 2024 तक मंडपम भवन, नई दिल्ली में 8वें भारत जल सप्ताह का आयोजन किया जा रहा है। भारत जल सप्ताह-2024 की अवधारणा जल शक्ति मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा एक नई अवधारणा के रूप में की गई थी। जिसका उद्देश्य पारंपरिक तरीकों से परे अत्याधुनिक समाधानों को बढ़ावा देकर बढ़ती जल कमी, प्रदूषण और मौजूदा जल आपूर्ति के अकुशल उपयोग के मुद्दों को सामने लाना है एवं इसका लक्ष्य जन जागरूकता पैदा करना, उपलब्ध जल के संरक्षण, बचाव और इष्टतम उपयोग के लिए प्रमुख रणनीतियों को लागू करने के लिए समर्थन प्राप्त करना है। पहली बार भारतीय जल सप्ताह का आयोजन वर्ष 2012 में किया गया था।

8वें भारत जल सप्ताह के उद्घाटन दिवस पर महामहिम राष्ट्रपति श्रीमती द्रोपदी मुर्मू के समक्ष डिंडौरी जिले के ग्राम पोंडी की निवासी उजियारो बाई ने गांव में जल संरक्षण, बचाव और इष्टतम उपयोग पर अपने संघर्ष से सफलता तक की कहानी सुनाते हुए बताया कि पोंडी ग्राम में लगातार पेड़ काटे जाने और पथरीली जमीन होने के कारण वर्षा का जल संग्रहित नहीं हो पाता था। लोगों को पीने के पानी के लिए झरनों व दूषित पानी के स्त्रोतों पर निर्भर रहना पड़ता था। जिससे जलजनित बीमारियों के फैलने से प्रति वर्ष दर्जनों लोगों की मृत्यु हो जाती थी। उजियारो दीदी पानी की इस समस्या को देखते हुए मुहिम चलाई और जल, जंगल, जमीन की लड़ाई लड़ी। उजियारों दीदी गांव में अनकों बार चौपाल लगाई व लोगों को घर-घर जाकर जल, जंगल बचाने और वर्षा का जल संग्रहित करने के लिए प्रेरित किया। छोटे-छोटे जरूरी नियम बनाये गए, पेड़ों की कटाई रोकी गई, वृक्षारोपण किये गए।

उजियारो बाई ने बताया कि इस कड़ी मेहनत और लग्नशील प्रयास से अब पोंड़ी ग्राम के पुराने झरने रिचार्ज हो गए, गांव के जल स्त्रोतों में वृद्धि हुई है। परिणाम स्वरूप अब गांव के लोगों को हर घर में शुद्ध पेयजल प्राप्त होता है। उन्होंने संदेश देते हुए कहा कि पेड़ है तो पानी है, पानी है तो जिंदगानी है।
उजियारो बाई शुद्ध पेयजल के लिए संघर्षपूर्ण अपने साथ लोगों को इस मुहिम में जोड़कर पूरे गांव को पानी की समस्या से निजात दिलाई।
उजियारो बाई के प्रयास आज अध्ययन और शोध का विषय है। जिसे दक्षिण आफ्रीका जैसे देशों के द्वारा समझा और अपनाया जा रहा है। उजियारो बाई ने न केवल जल संरक्षण अपितु कृषि क्षेत्र में उन्नत कार्य कर डिंडौरी जिले का नाम राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर रोशन किया है। जिसके लिए उन्हें विभिन्न राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय सम्मानों से सम्मानित किया जा चुका है। आज उजियारो बाई के प्रयासों की सराहना विश्वभर में की जा रही है, जो हमें प्रकृति के प्रति अपने दायित्वों का बोध कराती है।

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