सेवाजोहार (डिंडोरी):- शासन की मंशा रही कि सूखाग्रस्त जिलों में अमृत सरोवर निर्माण से जहाँ पानी की समस्या से ग्रामीणों को निजात मिलेगी तो वही क्षेत्र के जल स्तर को भी बढ़ावा मिलेगा। इसी के चलते अमृत सरोवर जैसी महत्वाकांक्षी योजना डिंडोरी जिले में लागू की गई और अरबों रु की लागत से जिले के सातों विकास खंडों में बड़ी संख्या में ऐसी जगहों को चिन्हित कर अमृत सरोवर का निर्माण कराया गया जहाँ बारिश के पानी को बड़ी मात्रा में इकट्ठा किया जा सके जिससे उस क्षेत्र में भूजल इस्तर को भी बढ़ाया जाए।

लेकिन देखने में सामने आ रहा है कि गुणवत्ता को दरकिनार कर निर्माण एजेंसी ग्रामीण यांत्रिकी सेवा संभाग के एसडीओ और उपयंत्री ने मनमानी कार्य कराते हुए महत्वाकांक्षी योजना महात्मा गांधी रोजगार गारंटी योजना पर ही सवाल खड़े करवा दिए है,जिसके चलते ग्रामीणों में आक्रोश देखा जा रहा है और वे जांच की मांग शासन और जिला प्रशासन से कर रहे है। हम बात यहाँ डिंडोरी जिला के अमरपुर विकासखंड क्षेत्र की ग्राम बरसिंघा माल की कर रहे है जहाँ लगभग 58 लाख रु की लागत से अमृत सरोवर तालाब का निर्माण कार्य मुतराही नाला में कराया गया था। जो बनकर तैयार तो हुआ लेकिन बारिश के पानी को इकट्ठा करने में कमजोर साबित हो रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि विभाग के जिम्मेदारों ने सही और ठोस काम नही कराया जिसके चलते बारिश का पानी तालाब से लगातार रिसाव होकर आगे व्यर्थ बह रहा है।
सूत्र बताते है कि इस अमृत सरोवर में कई गड़बड़ियां सामने आने के बाद तत्कालीन उपयंत्री अपना ट्रांसफर करवा कर जा चुके है और पानी का रिसाव ने दिखे इसके लिए तालाब की निचले हिस्से में फसल लगवा दी गई जिससे बहता हुआ पानी न दिखाई दे और कमी ढकी रहे। ग्रामीणों का यह भी आरोप है कि बारिश अभी समाप्त ही हुई है और तालाब का पानी कम बचा हुआ है यही रिसाव के हालात बने रहे तो गर्मी के दिनों में जल संकट फिर गरमा जाएगा और ग्रामीण और मवेशी प्यासे रह जायेगी।
वही इस तालाब में मछली पालन के लिए नर्मदा मैया समूह ने मछली के बीज डाले हुए है जिससे भविष्य में वे आमदनी भी कर सकते है। लेकिन अगर लगातार तालाब से पानी का रिसाव होता रहा तो ऐसे में कैसे मछली पालन होगा और समूह के लोग आमदनी बढ़ा पाएंगे।