सेवाजोहार (डिंडौरी) :- कलेक्टर अंजू पवन भदौरिया की मौजूदगी में रविवार 07 दिसंबर 2025 को कलेक्ट्रेट के ऑडिटोरियम में जिले के सभी कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर्स (सीएचओ) की बैठक आयोजित की गई। बैठक में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) डॉ. मनोज पाण्डे ने चरणबद्ध मातृत्व स्वास्थ्य सेवाएं, शिशु स्वास्थ्य सेवाएं और अन्य सभी स्वास्थ्य सेवाओं की विस्तृत समीक्षा प्रस्तुत की।
सीएमएचओ ने कहा कि “समाज के अंतिम व्यक्ति तक गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना विभाग की सर्वोच्च प्राथमिकता है।” बैठक में सभी पोर्टलों पर सीएचओ द्वारा दर्ज सेवाओं की प्रगति की समीक्षा की गई।
कलेक्टर ने दिए सख्त निर्देश — “कार्य पूरा तभी माना जाएगा जब पोर्टल पर डाटा दर्ज होगा”
कलेक्टर अंजू पवन भदौरिया ने बैठक में स्पष्ट निर्देश देते हुए कहा कि सभी राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों के तहत सेवा प्रदायगी सुनिश्चित की जाए। उन्होंने जोर देते हुए कहा—“मैदानी कार्य करने के बाद भी यदि डाटा पोर्टल में दर्ज नहीं किया जाता, तो कार्य अधूरा माना जाएगा। इससे आपकी सेवाओं की विश्वसनीयता पर प्रश्न खड़े होते हैं।”
उन्होंने खराब कार्यप्रदर्शन वाले सीएचओ को चेतावनी दी और समयसीमा में कार्य पूर्ण करने के निर्देश दिए। वहीं, बेहतर कार्य करने वाले सीएचओ को पुरस्कृत करने हेतु सीएमएचओ को निर्देशित किया गया। सीएचओ को मुख्यालय में निवासरत रहते हुए कार्य संपादन सुनिश्चित करने के लिए भी कहा गया।
सिकल सेल एवं टीबी की 100% स्क्रीनिंग पर जोर
डीटीओ डॉ. मनोज उरैती ने सिकल सेल और टीबी की 100% स्क्रीनिंग किए जाने की जानकारी दी। साथ ही पोर्टल में डाटा एंट्री की प्रक्रिया भी समझाई। गर्भवती माताओं की नियमित जांच एवं एनीमिया स्क्रीनिंग अनिवार्य
जिला अनुश्रवण एवं मूल्यांकन अधिकारी राजेश मरावी ने पीपीटी प्रस्तुति के माध्यम से बताया कि—सभी गर्भवती माताओं का प्रथम तिमाही में रजिस्ट्रेशन सुनिश्चित किया जाए। प्रथम, द्वितीय, तृतीय और चौथी जांच निर्धारित समयसीमा के भीतर सीएचओ एवं डॉक्टर द्वारा कराई जाए एनीमिया स्क्रीनिंग 100% किया जाना अनिवार्य है।
किशोर स्वास्थ्य एवं राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम पर विशेष चर्चा
आरबीएसके जिला समन्वयक ओमप्रकाश उरैती ने राष्ट्रीय किशोर स्वास्थ्य कार्यक्रम की जानकारी देते हुए 10 से 19 वर्ष के किशोरों में होने वाले शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक बदलावों के बारे में बताया। इसके साथ ही उन्होंने उमंग स्वास्थ्य केंद्रों में किशोरियों को अधिक से अधिक परामर्श सेवाएं उपलब्ध कराने पर जोर दिया।
राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत 0 से 18 वर्ष तक के जन्मजात विकृतियों से ग्रसित बच्चों की स्क्रीनिंग कर उन्हें जिला अर्ली इंटरवेंशन सेंटर, डिंडौरी भेजने के निर्देश दिए गए, ताकि समय पर उनका समुचित उपचार शासकीय एवं अनुमोदित निजी अस्पतालों में कराया जा सके। योजना में आर्थिक स्थिति का कोई बंधन नहीं है।
अधिकारी उपस्थित
बैठक में जनसंपर्क अधिकारी चेतराम अहिरवार, आनंद मोहरे, सौरभ जैन, यादवेंद्र परिहार सहित स्वास्थ्य विभाग का समस्त स्टाफ उपस्थित रहा।