पी.एम. श्री केंद्रीय विद्यालय डिंडोरी में भावनाओं के संगम के साथ मनाया गया दादा–दादी, नाना–नानी दिवस
सेवाजोहार (डिंडोरी):- पी.एम. श्री केंद्रीय विद्यालय डिंडोरी का परिसर शनिवार को कुछ अलग ही एहसासों से भर गया। मंच सजा था, बच्चे मुस्कुरा रहे थे और दर्शक दीर्घा में बैठे दादा–दादी, नाना–नानी की आँखों में अपने बीते बचपन की झलक साफ दिखाई दे रही थी। अवसर था ग्रांड पेरेंट्स डे का, जिसे विद्यालय ने अत्यंत गरिमामय, स्नेहिल और भावनात्मक वातावरण में मनाया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि विद्यालय के प्राचार्य सुनील कुमार सोनी रहे। उनके साथ प्रधानाध्यापक दिनेश झारिया, वरिष्ठ स्नातकोत्तर शिक्षक मुकेश निगम तथा विशिष्ट अतिथि के रूप में आमंत्रित कमला बरमैया (दादी माँ) की उपस्थिति ने आयोजन को विशेष बना दिया। दीप प्रज्वलन और माँ सरस्वती के पूजन के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ।
नन्हे विद्यार्थियों ने जैसे ही अपने हाथों से दादा–दादी और नाना–नानी के माथे पर तिलक लगाया, ग्रीटिंग कार्ड भेंट किए और स्नेह से चरण स्पर्श किया, पूरा सभागार तालियों से गूंज उठा। स्वागत गीत, भावपूर्ण नृत्य, नाट्य मंचन, कविता पाठ और शायरी के माध्यम से बच्चों ने अपने बुज़ुर्गों के प्रति सम्मान, प्रेम और कृतज्ञता को शब्द दिए। कई दादा–दादी भावुक होकर अपने आँसू नहीं रोक पाए।
अपने संबोधन में प्राचार्य सुनील कुमार सोनी ने कहा कि दादा–दादी और नाना–नानी परिवार की वह जड़ हैं, जिनसे संस्कार, परंपरा और जीवन मूल्यों की धारा बहती है। उनके अनुभव बच्चों के भविष्य का मार्गदर्शन करते हैं। उन्होंने केंद्रीय विद्यालय संगठन द्वारा ऐसे आयोजनों के महत्व पर भी प्रकाश डाला।
प्रधानाध्यापक दिनेश झारिया ने मोबाइल और डिजिटल युग में बढ़ती दूरी पर चिंता जताते हुए कहा कि आज बच्चों को नैतिकता, भावनात्मक संतुलन और जीवन का सही दृष्टिकोण देने में ग्रांड पेरेंट्स की भूमिका पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गई है।
कार्यक्रम में मंच पर आए दादा–दादी और नाना–नानी ने अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने कहा कि इस आयोजन ने उन्हें फिर से अपना बचपन लौटा दिया और बच्चों के साथ उनका रिश्ता और गहरा हुआ। विद्यालय द्वारा किए गए इस प्रयास की सभी ने मुक्तकंठ से सराहना की।
बुज़ुर्गों को उनका बचपन याद दिलाने के लिए शिक्षकों द्वारा रोचक खेलों का भी आयोजन किया गया, जिसमें दादा–दादी और नाना–नानी ने पूरे उत्साह के साथ भाग लिया। हँसी, ठहाकों और तालियों के बीच पीढ़ियों का यह संगम अविस्मरणीय बन गया।
कार्यक्रम के अंत में वरिष्ठ प्राथमिक शिक्षिका ममता खरे ने सभी आगंतुकों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए उनके स्वस्थ, सुखद और दीर्घायु जीवन की कामना की। विद्यालय के समस्त प्राथमिक शिक्षकों के समर्पित सहयोग से यह आयोजन एक यादगार अनुभव बन सका।
यह आयोजन केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि पीढ़ियों को जोड़ने वाला भावनात्मक सेतु बनकर सामने आया, जिसने यह संदेश दिया कि आधुनिकता की दौड़ में भी रिश्तों की गर्माहट सबसे कीमती है।