भारतीय किसान संघ के बैनर तले 5 दिनों से अनिश्चितकालीन हड़ताल, दो दिनों से क्रमिक भूख हड़ताल जारी
सेवाजोहार (डिंडोरी):- जहां एक ओर मध्यप्रदेश सरकार वर्ष 2026 को “कृषि वर्ष” के रूप में मनाने की घोषणा कर रही है, वहीं दूसरी ओर आदिवासी बाहुल्य जिला डिंडोरी में किसान नए वर्ष की शुरुआत भूख हड़ताल से करने को मजबूर हैं।
जिले के वीरांगना रानी दुर्गावती स्टेडियम, शहपुरा में भारतीय किसान संघ, डिंडोरी के बैनर तले किसान पिछले 5 दिनों से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर बैठे हैं। वहीं 1 जनवरी 2026 से क्रमिक भूख हड़ताल भी प्रारंभ कर दी गई है। किसानों का आरोप है कि शासन-प्रशासन उनकी मूलभूत समस्याओं की लगातार अनदेखी कर रहा है।
बिजली-पानी-खाद-बीज की समस्या से जूझ रहे किसान
किसानों का कहना है कि जिले में लंबे समय से
समय पर बिजली आपूर्ति नहीं,
सिंचाई व्यवस्था बदहाल,
खाद-बीज की भारी किल्लत,
और बढ़ती कीमतों ने खेती को घाटे का सौदा बना दिया है।
इन समस्याओं के कारण फसलें प्रभावित हो रही हैं, लेकिन इसके बावजूद अब तक कोई ठोस समाधान सामने नहीं आया है।
जश्न में सरकार, संघर्ष में किसान
आंदोलनरत किसानों का आरोप है कि एक ओर सरकार कृषि वर्ष मनाने की तैयारियों और कार्यक्रमों में व्यस्त है, वहीं दूसरी ओर अन्नदाता सड़क पर बैठकर भूखा रहने को मजबूर है। किसानों ने इसे सरकार की नीतियों और जमीनी हकीकत के बीच का बड़ा विरोधाभास बताया।
आंदोलन और तेज करने की चेतावनी
भारतीय किसान संघ के पदाधिकारियों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही किसानों की मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया गया, तो आंदोलन को और उग्र किया जाएगा।
भूख हड़ताल में शामिल किसानों की संख्या लगातार बढ़ रही है, जिससे प्रशासन की चिंता भी बढ़ने लगी है।
राजनीतिक विरोधाभास पर भी सवाल
गौरतलब है कि भारतीय किसान संघ, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) का आनुषांगिक संगठन है और प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी की सरकार होने के बावजूद किसानों की कोई सुनवाई नहीं हो पा रही है। इससे किसानों में भारी रोष और निराशा व्याप्त है।
फिलहाल डिंडोरी में किसानों का यह आंदोलन कृषि वर्ष 2026 की घोषणाओं पर गंभीर सवाल खड़े करता नजर आ रहा है। अब देखना यह होगा कि शासन-प्रशासन किसानों की पीड़ा को कब समझता है और क्या ठोस कदम उठाता है।