Tuesday, March 10, 2026

चांदी गिरवी रखकर लाखों की धोखाधड़ी, सूदखोरी मामले में आरोपी की जमानत खारिज, भेजा जेल

सेवाजोहार (डिंडोरी):- सूदखोरी और धोखाधड़ी से जुड़े एक मामले में न्यायालय न्यायिक दण्डाधिकारी डिंडोरी ने आरोपी रूप चंद्र साहू का ज़मानत आवेदन निरस्त करते हुए उसे न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेजने के आदेश दिए। मामला थाना गाड़ासरई में दर्ज अपराध क्रमांक 17/2026 से संबंधित है, जिसमें आरोपी के विरुद्ध धारा 420 भारतीय दंड संहिता तथा मध्यप्रदेश ऋणियों का संरक्षण अधिनियम 1937 की धारा 3 एवं 4 के तहत प्रकरण दर्ज किया गया है।

प्रकरण के अनुसार आरोपी ने 19 फरवरी 2023 को लगभग 11.400 किलोग्राम चांदी के जेवरात दो प्रतिशत मासिक ब्याज पर गिरवी रखकर फरियादी से 8,50,000 रुपये की राशि प्राप्त की थी। इसके बाद वर्ष 2024 में धनतेरस के अवसर पर जब फरियादी ने अपने जेवरात वापस लेने और पूरा हिसाब करने की बात कही तो आरोपी ने उससे 3,00,000 रुपये अतिरिक्त प्राप्त कर लिए और बाद में हिसाब कर चांदी वापस करने का आश्वासन दिया, लेकिन इसके बाद वह लगातार टालमटोल करता रहा और चांदी वापस नहीं की।

सुनवाई के दौरान आपत्तिकर्ता/ फरियादी की ओर से अधिवक्ता सम्यक जैन एवं अरविंद सोनी ने न्यायालय के समक्ष कड़ा पक्ष रखते हुए कहा कि आरोपी ने प्रारंभ से ही धोखाधड़ी की मंशा से फरियादी को विश्वास में लेकर उससे बड़ी राशि प्राप्त की। यह कृत्य भारतीय दंड संहिता की धारा 420 के आवश्यक तत्वों—अर्थात छलपूर्वक धोखा देकर संपत्ति प्राप्त करना—को स्पष्ट रूप से सिद्ध करता है।

अधिवक्ता सम्यक जैन ने यह भी तर्क दिया कि आरोपी द्वारा बिना वैध लाइसेंस के अत्यधिक ब्याज दर पर धन का लेन-देन करना तथा गिरवी रखी गई संपत्ति को वापस न करना मध्यप्रदेश ऋणियों का संरक्षण अधिनियम 1937 की धारा 3 एवं 4 के प्रावधानों का भी प्रत्यक्ष उल्लंघन है। उन्होंने न्यायालय को बताया कि आरोपी का कृत्य योजनाबद्ध आर्थिक शोषण और आपराधिक विश्वासघात की श्रेणी में आता है। यदि आरोपी को ज़मानत का लाभ दिया जाता है तो वह गवाहों को प्रभावित कर सकता है, फरियादी पर समझौते के लिए दबाव बना सकता है तथा साक्ष्यों से छेड़छाड़ कर प्रकरण को प्रभावित करने का प्रयास कर सकता है। इसलिए ऐसे गंभीर आर्थिक अपराध में आरोपी को जमानत का लाभ दिया जाना न्यायहित में नहीं होगा।

दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के पश्चात न्यायालय ने मामले की गंभीरता और प्रस्तुत तथ्यों को दृष्टिगत रखते हुए आरोपी का ज़मानत आवेदन निरस्त कर दिया तथा उसे न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेजने के आदेश दिए।

सुनवाई के दौरान आपत्तिकर्ता/ पीड़ित की ओर से अधिवक्ता सम्यक जैन एवं अरविंद सोनी उपस्थित रहे।

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