सेवाजोहार(डिंडोरी):– जिले में निजी स्कूलों की मनमानी पर अब लगाम कसने की तैयारी शुरू हो गई है। कलेक्टर अंजू पवन भदौरिया ने अशासकीय हाई और हायर सेकेंडरी विद्यालयों की समीक्षा बैठक लेकर साफ संदेश दे दिया है कि नियमों से बाहर जाकर काम करने वाले स्कूलों को बख्शा नहीं जाएगा।
बैठक में सीबीएसई, आईसीएसई, एमपी बोर्ड सहित अन्य बोर्ड से जुड़े स्कूलों की मान्यता, अपग्रेडेशन और 2027-28 सत्र के नवीनीकरण जैसे अहम मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई। जिले के कई निजी स्कूलों के प्राचार्य और प्रतिनिधि इस दौरान मौजूद रहे।
कलेक्टर ने दो टूक शब्दों में कहा कि कोई भी स्कूल तय दर से ज्यादा फीस नहीं वसूलेगा। अगर कहीं भी अभिभावकों से अतिरिक्त शुल्क लेने की शिकायत मिली, तो सीधे सख्त कार्रवाई की जाएगी। सभी स्कूलों को शासन के नियमों के पालन का शपथ पत्र एजुकेशनल पोर्टल पर अपलोड करना अनिवार्य कर दिया गया है।

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि स्कूल केवल 10 महीने के संचालन के हिसाब से ही फीस लें—पूरे साल का शुल्क वसूलने की मनमानी अब नहीं चलेगी। साथ ही छात्रों के आधार कार्ड और अन्य जरूरी दस्तावेज समय पर पोर्टल पर अपलोड करने के निर्देश दिए गए।
स्कूल वाहन और सुरक्षा पर भी फोकस
निजी स्कूलों में चलने वाले वाहनों को लेकर भी कलेक्टर ने सख्त रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि वाहन चालक पूरी तरह योग्य हों और सभी सुरक्षा मानकों का पालन अनिवार्य रूप से किया जाए।
दुकानों से खरीद की बाध्यता खत्म
अभिभावकों को राहत देते हुए कलेक्टर ने साफ निर्देश दिए कि किसी भी छात्र को एक ही दुकान से किताबें, यूनिफॉर्म या अन्य सामग्री खरीदने के लिए मजबूर नहीं किया जाएगा। अभिभावकों को स्वतंत्रता देना जरूरी है।
बाल सुरक्षा पर अनिवार्य व्यवस्था
हर निजी स्कूल में बाल सुरक्षा समिति और पॉक्सो समिति का गठन अब अनिवार्य होगा। इनमें अभिभावक, विशेषज्ञ और शिक्षक शामिल रहेंगे। स्कूल गेट पर बाल सुरक्षा और यौन शोषण से संरक्षण से जुड़े फ्लेक्स बोर्ड भी लगाना जरूरी किया गया है।
शिक्षा गुणवत्ता पर भी जोर
कलेक्टर ने योग्य शिक्षकों की नियुक्ति, लाइब्रेरी, खेल मैदान और शैक्षणिक व साहसिक गतिविधियों के नियमित संचालन पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए।
बैठक में जिला शिक्षा अधिकारी, डीपीसी, एडीपीसी प्रवीण तिवारी, बीईओ, बीआरसी सहित कई अधिकारी और स्कूल प्रबंधन से जुड़े लोग मौजूद रहे।
डिंडौरी में अब निजी स्कूलों की मनमानी पर प्रशासन की नजर टेढ़ी हो चुकी है, और नियम तोड़ने वालों पर कार्रवाई तय मानी जा रही है।