गंभीर मामले में मंत्री महोदया और सांसद ने साधी चुप्पी ?
सेवाजोहार (मंडला):- विश्व प्रसिद्ध कान्हा नेशनल पार्क में लगातार हो रही बाघों की मौत के विरोध में पत्रकारों ने मोर्चा खोल दिया है। 14 सूत्रीय मांगों को लेकर सोमवार से कलेक्ट्रेट मार्ग पर अनिश्चितकालीन धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया गया है। यह मामला अब मंडला से भोपाल तक सुर्खियों में आ गया हैं। संभावना जताई जा रही है कि जिले के पत्रकारों ने मुखर होकर पार्क प्रबंधन के खिलाफ आवाज उठाई है जो प्रदेश के मुख्यमंत्री के कानों तक पहुंच चुकी हैं।
मंडला जिले के कान्हा नेशनल पार्क में लगातार बाघों की हो रही मौतों और उनके कारणों को लेकर कथित तौर पर भ्रामक जानकारी दिए जाने के विरोध में पत्रकार अब खुलकर सामने आ गए हैं। इसी क्रम में जिले के पत्रकारों ने एकजुट होकर 14 सूत्रीय मांगों के साथ अनिश्चितकालीन धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया है।
धरना स्थल पर पहले ही दिन आमजन, जनप्रतिनिधि, समाजसेवी और विभिन्न पत्रकार संगठनों के पदाधिकारियों का व्यापक समर्थन देखने को मिला। बड़ी संख्या में लोग धरना स्थल पहुंचकर पत्रकारों की मांगों का समर्थन कर रहे हैं।
पत्रकारों का कहना है कि कान्हा नेशनल पार्क मंडला जिले की पहचान है, जहां देश-विदेश से पर्यटक विशेष रूप से बाघों को देखने आते हैं। पार्क प्रबंधन को हर वर्ष करोड़ों रुपये का राजस्व प्राप्त होता है, इसके बावजूद बाघों की सुरक्षा और संरक्षण को लेकर गंभीर लापरवाही सामने आ रही है।
आंकड़ों के अनुसार, पिछले एक वर्ष में यहां 12 बाघों की मौत हो चुकी है, जबकि जनवरी 2026 से अब तक 7 बाघों की मौत ने प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। बाघों की मौत के कारणों को लेकर भी लगातार भ्रम की स्थिति बनी हुई है—कभी आपसी संघर्ष, कभी फेफड़ों के संक्रमण, तो अब श्वानों से संक्रमण को कारण बताया जा रहा है।
पत्रकारों का आरोप है कि इस तरह के अलग-अलग कारण बताकर प्रबंधन वास्तविक स्थिति छिपाने का प्रयास कर रहा है। पत्रकारों की प्रमुख 14 मांगें
हर माह पत्रकारों की 5 सदस्यीय टीम से मॉनिटरिंग कराई जाए।
गलत जानकारी देने पर प्रबंधन के खिलाफ एफआईआर दर्ज हो।
पार्क के अंदर बने पक्के निर्माण (होटल/रेस्ट हाउस) हटाए जाएं।
तीनों गेटों के आसपास का अतिक्रमण तत्काल हटाया जाए।
पार्क क्षेत्र के रिसोर्ट/होटल मांसाहार मुक्त किए जाएं।
डीजे, आतिशबाजी और शादी समारोहों पर प्रतिबंध लगे।
पूरे प्रबंधन स्टाफ को बदला जाए।
पिछले 5 वर्षों के बजट और खर्च का सार्वजनिक ब्यौरा दिया जाए।
प्रचार-प्रसार पर खर्च की जानकारी सार्वजनिक की जाए।
पत्रकारों और अधिकारियों का व्हाट्सएप ग्रुप बनाया जाए।
पार्क के अंदर हुए निर्माण कार्यों और सुविधाओं की जानकारी दी जाए।
पशु संक्रमण को देखते हुए एनजीओ पर प्रतिबंध लगाया जाए।
प्रतिदिन जंगल सफारी में जाने वाली जिप्सियों की जानकारी सार्वजनिक हो।
पार्क क्षेत्र में प्लास्टिक डिस्पोजल पूरी तरह प्रतिबंधित किया जाए।
कान्हा जैसे विश्व प्रसिद्ध टाइगर रिजर्व में लगातार हो रही बाघों की मौत ने न सिर्फ वन्यजीव संरक्षण पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि प्रबंधन की पारदर्शिता पर भी गंभीर संदेह पैदा किया है। अब यह देखना अहम होगा कि प्रशासन और वन विभाग पत्रकारों की मांगों पर क्या रुख अपनाता है।