Tuesday, July 28, 2026

खतरे के साए में मेहनत! गाड़ासरई काष्ठागार के मजदूरों के पास न सुरक्षा, न सुविधाएं

भाजपा विधायक ओमप्रकाश धुर्वे ने सोशल मीडिया पर उठाया मुद्दा

सेवाजोहार (डिंडौरी):– जिले के गाड़ासरई काष्ठागार में रोज़ाना अपनी जान जोखिम में डालकर काम करने वाले मजदूर आज भी बुनियादी सुविधाओं और सुरक्षा से वंचित हैं। करीब 4 वर्ग किलोमीटर में फैले इस काष्ठागार में साल की लकड़ियों का भंडारण किया जाता है, जहां लगभग 20 मजदूर रस्सियों के सहारे भारी-भरकम लकड़ियों को ट्रकों में लोड करने का कठिन और जोखिम भरा कार्य करते हैं।

भाजपा विधायक ओमप्रकाश धुर्वे के बताए अनुसार एक ट्रक लोड करने पर मजदूरों को लगभग ₹15,000 का भुगतान किया जाता है, लेकिन इस मेहनत के बदले उन्हें सुरक्षा की कोई गारंटी नहीं मिलती। लकड़ी लोडिंग के दौरान हर पल दुर्घटना की आशंका बनी रहती है, बावजूद इसके मजदूरों के लिए दुर्घटना बीमा या सुरक्षा बीमा जैसी कोई व्यवस्था नहीं है। यदि किसी हादसे में कोई मजदूर घायल हो जाए या जान गंवा दे, तो उसके परिवार के सामने गंभीर संकट खड़ा हो सकता है।

इतना ही नहीं, काष्ठागार परिसर में पेयजल जैसी मूलभूत सुविधा का भी अभाव है। भीषण गर्मी और लगातार शारीरिक श्रम के बीच मजदूरों को पानी जैसी आवश्यक सुविधा के लिए भी परेशानी उठानी पड़ती है।

भाजपा विधायक ओमप्रकाश धुर्वे ने सोशल मीडिया में वीडियो पोस्ट कर न सिर्फ मजदूरों की सुरक्षा का मुद्दा उठाया है बल्कि वन विभाग से मांग की है कि गाड़ासरई काष्ठागार में कार्यरत सभी मजदूरों के लिए दुर्घटना बीमा, सुरक्षा उपकरण (सेफ्टी गियर), स्वच्छ पेयजल और अन्य आवश्यक सुविधाएं तत्काल उपलब्ध कराई जाएं, ताकि उनकी सुरक्षा और सम्मानजनक कार्य परिस्थितियां सुनिश्चित हो सकें।

मजदूरों का कहना है कि जंगल की संपदा को सुरक्षित रखने में उनकी अहम भूमिका है, इसलिए उनकी सुरक्षा और सुविधाओं को भी सर्वोच्च प्राथमिकता मिलनी चाहिए।

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