डिंडौरी में दो दिन में दो बस हादसे, तीसरे दिन ओवरलोड बस का वीडियो वायरल; अब परिवहन विभाग और पुलिस की कार्रवाई पर नजर
सेवाजोहार(डिंडौरी):- डिंडौरी जिले में पिछले दो दिनों में अलग-अलग थाना क्षेत्रों में हुए दो बस हादसों ने यात्री सुरक्षा और बस संचालन व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। दोनों घटनाओं में कई यात्रियों को चोटें आईं। राहत की बात यह रही कि किसी यात्री की जान नहीं गई। वहीं, तीसरे दिन डिंडौरी से भोपाल जाने वाली एक स्लीपर बस में क्षमता से अधिक यात्रियों के सवार होने का वीडियो सामने आने के बाद मामला फिर चर्चा में है।
जानकारी के अनुसार, 1 सितंबर को अमरपुर चौकी क्षेत्र में अग्रवाल बस अनियंत्रित होकर पलट गई थी, जिसमें करीब पांच यात्रियों के घायल होने की जानकारी सामने आई थी। इसके अगले दिन 2 सितंबर की शाम मेंहदवानी थाना क्षेत्र की राई घाटी में मंडला से डिंडौरी आ रही खेरावली बस का ब्रेक फेल होने की घटना सामने आई। बताया गया कि बस पीछे की ओर जाने के बाद चट्टान से टकरा गई, जिसमें करीब छह यात्रियों को चोटें आईं।
इन दोनों घटनाओं के बाद बसों की फिटनेस, ब्रेक सिस्टम, परमिट, दस्तावेज और यात्री क्षमता की जांच को लेकर सवाल उठ रहे हैं। सवाल यह भी है कि हादसों के बाद संबंधित विभागों की ओर से बसों की विशेष जांच या अभियान चलाया गया या नहीं।
स्लीपर बस में क्षमता से अधिक सवारी का वीडियो वायरल
इसी बीच 3 सितंबर की शाम डिंडौरी से भोपाल के लिए रवाना हुई गुरु बस को लेकर भी सवाल खड़े हुए। बस के भीतर क्षमता से अधिक यात्रियों के होने का दावा किया गया है। इस संबंध में मध्यप्रदेश आदिवासी कांग्रेस के सह सचिव महेंद्र परस्ते ने बस के अंदर का वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर साझा किया और यात्रियों की स्थिति को लेकर सवाल उठाए।
वीडियो में यात्रियों की संख्या और बैठने की व्यवस्था को लेकर किए गए दावों की अब संबंधित विभाग द्वारा जांच किया जाना जरूरी है। यदि जांच में निर्धारित यात्री क्षमता से अधिक सवारी ले जाने की पुष्टि होती है तो नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है।
क्षमता से अधिक सवारी पर क्या कार्रवाई हो सकती है?
मोटर वाहन कानून और यात्री वाहन संचालन से जुड़े नियमों के तहत बस में अनुमत क्षमता से अधिक यात्रियों को बैठाना/ले जाना नियमों का उल्लंघन हो सकता है। मामले की प्रकृति और जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर परिवहन विभाग द्वारा चालान, परमिट संबंधी कार्रवाई, वाहन को रोकना/जब्त करना अथवा अन्य वैधानिक कार्रवाई की जा सकती है।
यदि बस की फिटनेस, परमिट, बीमा या अन्य अनिवार्य दस्तावेजों में भी कमी पाई जाती है तो संबंधित प्रावधानों के तहत अलग से कार्रवाई का प्रावधान है। वहीं, यदि ओवरलोडिंग के कारण यात्रियों की सुरक्षा से गंभीर खिलवाड़ सामने आता है तो मामले की गंभीरता के अनुसार अन्य कानूनी प्रावधान भी लागू हो सकते हैं।
यात्रियों की सुरक्षा सबसे बड़ा सवाल
बस में सफर करने वाले हर यात्री से किराया लिया जाता है, ऐसे में उसे सुरक्षित और निर्धारित क्षमता के भीतर यात्रा की सुविधा मिलना जरूरी है। खासकर स्लीपर बसों में निर्धारित सीट या बर्थ की क्षमता से अधिक यात्रियों को समायोजित करने के आरोप सामने आते हैं तो यह सीधे यात्री सुरक्षा से जुड़ा मामला बन जाता है।
ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या बसों में निर्धारित क्षमता से अधिक यात्रियों को बैठाने की अनुमति किसी भी परिस्थिति में दी जा सकती है? यदि नहीं, तो ऐसी बसों पर रास्ते में नियमित जांच क्यों नहीं हो रही?
अब पुलिस और परिवहन विभाग की कार्रवाई पर नजर
लगातार दो बस हादसों और उसके बाद क्षमता से अधिक सवारी का कथित वीडियो सामने आने के बाद अब लोगों की नजर जिला परिवहन विभाग और पुलिस प्रशासन पर है। क्या विभाग वायरल वीडियो की जांच करेगा? क्या संबंधित बस के परमिट, फिटनेस और यात्री क्षमता की जांच होगी? क्या जिले में संचालित अन्य बसों की भी विशेष जांच की जाएगी?
इन सवालों के जवाब कार्रवाई के बाद ही सामने आएंगे। फिलहाल पूरे मामले में जांच और आधिकारिक कार्रवाई का इंतजार है।