आंगनवाड़ी केंद्रों की नियमित निगरानी के निर्देश, लापरवाही पर वेतन रोकने और निलंबन की कार्रवाई के प्रस्ताव भेजने को कहा
सेवाजोहार (डिंडोरी):- जिले में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं तथा पोषण कार्यक्रमों को प्रभावी बनाने के लिए कलेक्टर अंजू पवन भदौरिया की अध्यक्षता में जिला स्वास्थ्य समिति एवं महिला बाल विकास विभाग की संयुक्त समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में कलेक्टर ने गर्भवती महिलाओं के पंजीयन, स्वास्थ्य परीक्षण, टीकाकरण और आंगनवाड़ी केंद्रों की निगरानी में लापरवाही पर कड़ी नाराजगी जताते हुए संबंधित अधिकारियों-कर्मचारियों की जवाबदेही तय करने के निर्देश दिए।
कलेक्टर ने स्पष्ट कहा कि नौ माह की गर्भवती महिला की जानकारी समय पर नहीं होना गंभीर लापरवाही है। गर्भवती महिलाओं की नियमित निगरानी और समय पर स्वास्थ्य परीक्षण से संभावित जटिलताओं की पहचान कर उचित उपचार सुनिश्चित किया जा सकता है। उन्होंने निर्देश दिए कि जिले में कोई भी गर्भवती महिला पंजीयन से वंचित न रहे। गर्भावस्था के दौरान नियमित स्वास्थ्य परीक्षण, निर्धारित टीकाकरण, एनीमिया की जांच एवं उपचार तथा हाई रिस्क प्रेग्नेंसी की पहचान कर आवश्यक चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं।
लापरवाही पर वेतन रोकने और निलंबन की कार्रवाई के निर्देश
बैठक में कलेक्टर ने कहा कि स्वास्थ्य एवं पोषण सेवाओं का लाभ प्रत्येक पात्र हितग्राही तक पहुंचना चाहिए। निर्धारित लक्ष्यों की पूर्ति में लापरवाही अथवा कार्यों में अपेक्षित प्रगति नहीं मिलने पर संबंधित अधिकारी-कर्मचारियों की जवाबदेही तय कर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कर्मचारियों की कार्यक्षमता बढ़ाने के लिए नियमित प्रशिक्षण एवं कार्यशालाएं आयोजित करने तथा कार्यों में प्रगति नहीं होने पर वेतन रोकने की कार्रवाई के लिए प्रस्ताव भेजने के निर्देश दिए।
महिला एवं बाल विकास विभाग को आंगनवाड़ी केंद्रों का नियमित निरीक्षण करने के निर्देश देते हुए कलेक्टर ने कहा कि केंद्रों में बच्चों की उपस्थिति, उपलब्ध सुविधाओं और पोषण व्यवस्था की लगातार निगरानी की जाए। निर्धारित मीनू के अनुसार बच्चों को पोषण आहार उपलब्ध कराया जाए तथा उनके पोषण स्तर की नियमित जांच की जाए। कुपोषित बच्चों की पहचान होने पर समय पर उपचार और आवश्यक पोषण प्रबंधन सुनिश्चित किया जाए। निरीक्षण एवं निगरानी में लापरवाही पाए जाने पर संबंधित अधिकारी-कर्मचारियों के विरुद्ध निलंबन के प्रस्ताव सहित नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
वाहन नहीं मिलने पर निजी वाहन से अस्पताल पहुंचने पर मिलेगी एक हजार रुपये की सहायता
बैठक में गर्भवती महिलाओं को अस्पताल पहुंचाने की व्यवस्था की भी समीक्षा की गई। स्वास्थ्य विभाग ने बताया कि यदि गर्भवती महिला को अस्पताल पहुंचने के लिए शासकीय वाहन उपलब्ध नहीं हो पाता है, तो आशा कार्यकर्ता के माध्यम से वरिष्ठ अधिकारी को सूचना देकर निजी वाहन से अस्पताल पहुंचने पर नियमानुसार एक हजार रुपये की सहायता राशि प्रदान की जाएगी।
शेष बच्चों का शत-प्रतिशत टीकाकरण कराने के निर्देश
कलेक्टर ने टीकाकरण कार्यक्रम की समीक्षा करते हुए शेष बच्चों का शत-प्रतिशत टीकाकरण अभियान मोड में पूरा कराने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं में किसी भी स्तर पर लापरवाही नहीं होनी चाहिए। गर्भावस्था के दौरान उच्च रक्तचाप के प्रबंधन तथा हाई रिस्क गर्भावस्था के मामलों पर विशेष ध्यान दिया जाए, ताकि समय रहते आवश्यक उपचार उपलब्ध कराया जा सके।
बैठक में राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम की समीक्षा करते हुए टीबी मरीजों की समय पर जांच, उपचार एवं पोषण सहायता सुनिश्चित करने को कहा गया। इसके साथ ही राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम, राष्ट्रीय किशोर स्वास्थ्य कार्यक्रम और पोषण पुनर्वास केंद्र की गतिविधियों की समीक्षा की गई। कलेक्टर ने चिन्हित बच्चों का समय पर उपचार तथा आवश्यकता के अनुसार उन्हें उच्च स्वास्थ्य संस्थानों में रेफर करने के निर्देश दिए।
स्वास्थ्य और महिला बाल विकास विभाग के बीच समन्वय पर जोर
कलेक्टर अंजू पवन भदौरिया ने स्वास्थ्य एवं महिला बाल विकास विभाग के अधिकारियों को आपसी समन्वय से कार्य करने और मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य के साथ बच्चों के पोषण स्तर में सुधार लाने के निर्देश दिए। उन्होंने मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी तथा जिला कार्यक्रम अधिकारी को विकासखंड स्तर पर नियमित समीक्षा बैठक आयोजित कर योजनाओं की प्रगति की निगरानी करने और निर्धारित लक्ष्यों की शत-प्रतिशत पूर्ति सुनिश्चित करने को कहा।
बैठक में जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी दिव्यांशु चौधरी सहित स्वास्थ्य विभाग एवं महिला बाल विकास विभाग के जिला और विकासखंड स्तरीय अधिकारी उपस्थित रहे।