सेवाजोहार (डिंडोरी):- मध्यप्रदेश के आदिवासी जिला डिंडोरी के विकासखंड मेहदवानी अंतर्गत ग्राम कठोतिया के ग्रामीणों ने जून महीने में कलेक्टर डिंडोरी को जनसुनवाई में शिकायत कर कठौतिया के शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय के प्राचार्य को हटाने की मांग की थी। ग्रामीणों की शिकायत पत्र में उल्लेख था कि पूर्व में शा०उ०मा०वि० में पदस्थ उच्च०मा० शिक्षक चरनलाल मरावी (प्रभारी प्राचार्य) का प्रबंधन एवं कार्य करने की शैली निम्नस्तर की है। जिसके परिणाम स्वरूप विधालय में अराजकता का वातावरण निर्मित हो गया है। छात्र/छात्राओं एवं शिक्षकों को उचित मार्गदर्शन एवं नियंत्रण करने की क्षमता की पूरी कमी है। ऐसी स्थिति में विघालय का शैक्षणिक स्तर एवं अनुशासन पूरी तरह से समाप्त हो गया है। जिसका खामियाजा ग्रामीण और भोले-भाले छात्र/छात्राओं और अभिभावकों को भुगतना पड रहा है।

यह कि इनके कार्यकाल में छात्र/छात्राएं विघालय समय में जंगल पहाड में एवं किकरकुण्ड जलप्रपात में जाकर अश्लील हरकतें करते पाये गये जिनको विद्यालय के शिक्षकों एवं अधिकारियों और जनपद अध्यक्ष के द्वारा वापस विद्यालय लाया गया यह कई बार हुआ लेकिन चरन मरावी के द्वारा प्रभारी प्राचार्य के द्वारा कोई सुधार नहीं हुआ ।

यह कि इसके स्थानांतरण उपरांत रामकुमार चंद्रौल उच्च० मा० शिक्षक (प्रभारी प्राचार्य) ने जब शा०३०मा०वि० कठौतिया में अपना कार्यभार ग्रहण करने के एक सप्ताह के अंदर ही विद्यालय में अध्ययनरत छात्र/छात्राओं एवं शिक्षकों में परिवर्तन साफ दिखाई देने लगा था। सभी शिक्षक एवं छात्र/छात्रायें समय पर विद्यालय आने लगे एवं पूरी तरह से अनुशासित रहकर अध्ययनकार्य करने लगे साथ ही विद्यालय में उत्पन्न अराजकता का वातावरण समाप्त होता नजर आ रहा था। जिससे छात्र/छात्राओं एवं अभिभावकों में खुशी का लहर दिखाई देने लगी थी
यह कि मध्यप्रदेश शासन जनजातीय कार्य विभाग मंत्रालय भोपाल के आदेश कमांक 6/1/1/0010/2025/ED-ESTB-CTD/E-71-7340 भोपाल दिनांक 21.08.2025के तहत स्थानांतरण आदेश निरस्त होने से मा०शा०३०मा०वि० कौतिया के छात्र/छात्राओं एवं अभिभावकों में निराशा का वातावरण निर्मित हो गया है जिससे अभिभावक अपने छात्र/छात्राओं को लेकर एक बार पुनः चिंतित हो गये है।

समस्त ग्रामीणों की मांग है कि शा०३०मा०वि० कठौतिया में रामकुमार चंद्रोल एवं शा०उ०मा०वि० सारसडोली के चरन मरावी उ०मा०शि० (प्रभारी प्राचार्य) उ०मा०शि० (प्रभारी पाचार्य) को यथावत रखने की ग्रामीणों ने मांग की हैं।