सेवाजोहार (डिंडोरी):- संवेदनशीलता, धैर्य और निरंतर प्रयासों की बदौलत लगभग दो माह से लापता एक महिला को उसके परिवार से मिलाने में वन स्टॉप सेंटर डिंडोरी ने सराहनीय सफलता हासिल की है। महिला के परिवार से पुनर्मिलन का यह पल बेहद भावुक और राहत भरा रहा। जानकारी के अनुसार ग्राम करौंदा, थाना गाड़ासरई क्षेत्र में एक अज्ञात महिला पिछले कुछ दिनों से भटकती हुई मिली थी। स्थानीय पुलिस द्वारा उसे सुरक्षा और देखभाल के लिए वन स्टॉप सेंटर डिण्डौरी में अस्थायी आश्रय दिलाया गया। प्रारंभिक दिनों में महिला बेहद सहमी हुई थी और मानसिक रूप से विचलित होने के कारण वह अपना नाम या पता भी स्पष्ट रूप से नहीं बता पा रही थी।
इस दौरान डिंडोरी कलेक्टर अंजू पवन भदौरिया द्वारा वन स्टॉप सेंटर का औचक निरीक्षण किया गया और महिला की पहचान एवं परिवार का पता लगाने के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए। इसके बाद वन स्टॉप सेंटर की टीम ने लगातार परामर्श, देखरेख और मानवीय संवेदनाओं के साथ महिला का विश्वास जीतने का प्रयास किया। धीरे-धीरे महिला ने बातचीत शुरू की और उसने अपने निवास स्थान के रूप में बिहार राज्य के बेगूसराय जिले के ग्राम बिचौली का नाम बताया। इसके आधार पर वन स्टॉप सेंटर की प्रशासक सविता धार्वे और केस वर्कर स्मिता चौरसिया ने बेगूसराय स्थित वन स्टॉप सेंटर से संपर्क किया और जानकारी साझा की।
लगातार संपर्क और प्रयासों के बाद महिला के परिवार का पता चल सका। इसके बाद वीडियो कॉल के माध्यम से महिला की बातचीत उसके परिजनों से कराई गई। बातचीत और पहचान के बाद परिवार को विश्वास हो गया कि वह उनकी ही परिजन है। महिला की पहचान होने पर उसके पति चुनचुन पासवान और जीजा रामअवतार पासवान डिण्डौरी स्थित वन स्टॉप सेंटर पहुंचे।
परिजनों ने बताया कि महिला अचानक मायके से निकल गई थी और तब से लापता थी। उसकी तलाश के लिए तीन अलग-अलग थानों में शिकायत दर्ज कराई गई थी और कई जगह से सूचना मिलने पर पहचान के लिए भी बुलाया गया, लेकिन हर बार निराशा हाथ लगी। अंततः वन स्टॉप सेंटर डिण्डौरी के प्रयासों से वीडियो कॉल के माध्यम से सही पहचान संभव हो सकी।
करीब दो महीने बाद परिवार से मिलते ही महिला की आंखों में खुशी के आंसू छलक पड़े और परिजनों ने भी राहत की सांस ली। सभी ने वन स्टॉप सेंटर की टीम के प्रति आभार व्यक्त किया।
इस प्रकार दिनांक 12 मार्च 2026 को वन स्टॉप सेंटर डिण्डौरी के सफल प्रयासों से महिला (कविता – परिवर्तित नाम) को उसके परिवार में सुरक्षित रूप से पुनर्वासित किया गया। यह घटना मानवीय संवेदनाओं, प्रशासनिक सजगता और सतत प्रयासों का एक प्रेरणादायक उदाहरण बन गई है।