सेवाजोहार (डिंडोरी) :- कभी-कभी कुछ कागज़ महज़ दस्तावेज नहीं होते, बल्कि किसी के सपनों, भविष्य और पहचान की नींव बन जाते हैं। ऐसा ही एक मार्मिक मामला डिंडोरी जिले की जनसुनवाई में सामने आया, जहां एक युवती की आंखों में अपने भविष्य को बचाने की उम्मीद साफ झलक रही थी।
विकासखंड समनापुर के ग्राम धावा केवलारी निवासी प्रांजल मरावी ने मंगलवार को आयोजित जनसुनवाई में पहुंचकर कलेक्टर अंजू पवन भदौरिया से अपने मूल दस्तावेज वापस दिलाने की गुहार लगाई। युवती ने बताया कि भारत इंस्टीट्यूट डिंडोरी द्वारा उसके सभी ओरिजनल दस्तावेज वर्षों से अपने पास रखे गए थे और बार-बार अनुरोध के बावजूद उसे लौटाया नहीं जा रहा था।
ये दस्तावेज प्रांजल के लिए सिर्फ कागज़ नहीं, बल्कि उसकी पढ़ाई, करियर और आत्मनिर्भर बनने की राह की कुंजी थे। लगातार प्रयासों के बाद भी जब कोई सुनवाई नहीं हुई, तब उसने प्रशासन की चौखट पर दस्तक दी।
युवती की पीड़ा को गंभीरता से सुनते हुए कलेक्टर अंजू पवन भदौरिया ने तुरंत कार्रवाई के निर्देश दिए। उन्होंने जिला चिकित्सालय के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी मनोज पांडे को मामले में हस्तक्षेप कर आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
निर्देश मिलते ही स्वास्थ्य विभाग की टीम सक्रिय हुई और भारत इंस्टीट्यूट पहुंचकर पूरी प्रक्रिया के तहत युवती के मूल दस्तावेज वापस दिलाए गए।
जानकारी के अनुसार, प्रांजल ने वर्ष 2018-19 में जीएनएम नर्सिंग कोर्स में प्रवेश लिया था, जिसके दौरान संस्था द्वारा 10वीं-12वीं की अंकसूची, जाति प्रमाण पत्र, स्थायी निवास प्रमाण पत्र सहित अन्य मूल दस्तावेज जमा करा लिए गए थे। तब से वे वापस नहीं किए जा रहे थे। अंततः 17 मार्च 2026 को जनसुनवाई में की गई शिकायत के बाद उसे न्याय मिला।
जैसे ही दस्तावेज उसके हाथों में पहुंचे, उसके चेहरे पर सुकून और खुशी की झलक साफ दिखाई दी। यह सिर्फ कागज़ों की वापसी नहीं थी, बल्कि एक टूटती उम्मीद का फिर से जी उठना था।
यह घटना न केवल प्रशासन की संवेदनशीलता और तत्परता को दर्शाती है, बल्कि यह भी संदेश देती है कि जब व्यवस्था सजग हो, तो हर आवाज़ सुनी जाती है और हर हक वापस मिल सकता है।