लोकतंत्र सेनानी का छलका दर्द: भाजपा नेता पर आरोप
सेवाजोहार (डिंडोरी):- मध्यप्रदेश के आदिवासी अंचल डिंडौरी से एक बेहद संवेदनशील और चौंकाने वाली तस्वीर सामने आई है, जहां एक बुजुर्ग मीसा बंदी (लोकतंत्र सेनानी) खुद को सत्ता के सामने बेबस महसूस करता नजर आया।
शहपुरा ब्लॉक निवासी बुजुर्ग जयनारायण साहू की पीड़ा उस वक्त फूट पड़ी, जब वे कलेक्ट्रेट की जनसुनवाई में पहुंचे। आंखों में आंसू और दिल में दर्द लिए उन्होंने कलेक्टर अंजू पवन भदौरिया के सामने अपना सम्मान—ताम्रपत्र—वापस कर दिया।

“सम्मान अब अपमान बन गया है”
जयनारायण साहू ने आरोप लगाया कि शहपुरा के भाजपा मंडल अध्यक्ष द्वारा उनकी जमीन पर कब्जा किया जा रहा है और लगातार उन्हें प्रताड़ित किया जा रहा है।
बुजुर्ग की आवाज कांप रही थी, लेकिन दर्द साफ झलक रहा था। उन्होंने कहा—
“जिस ताम्रपत्र को मैंने गर्व से संभालकर रखा, आज वही मेरे लिए अपमान का कारण बन गया है… इसे मैं वापस करता हूं।”

जनसुनवाई में भावुक दृश्य
जनसुनवाई के दौरान माहौल बेहद भावुक हो गया। साहू अपनी बात रखते-रखते रो पड़े। वहां मौजूद हर व्यक्ति इस दृश्य को देखकर स्तब्ध रह गया—एक लोकतंत्र सेनानी न्याय के लिए दर-दर भटकने को मजबूर!
मीसा बंदी बुजुर्ग का आरोप है कि शहपुरा भाजपा मंडल अध्यक्ष भजन लाल ने उनकी जमीन में एक टपरा रखा हैं। बुजुर्ग का आरोप है कि भजन लाल चक्रवर्ती जो भाजपा शहपुरा का मंडल अध्यक्ष हैं उनसे मैने कहा कि जमीन का सीमांकन करवा ले ,लेकिन तीन साल से वह जमीन में कब्जा किए हुए हैं और सीमांकन नहीं करवा रहा। इसकी शिकायत मैंने शहपुरा थाना ,तहसीलदार और एसडीएम तक से की हैं लेकिन कोई कारवाई नहीं हुई
कलेक्टर ने दिखाई संवेदनशीलता
मामले की गंभीरता को देखते हुए कलेक्टर अंजू पवन भदौरिया ने तुरंत संज्ञान लिया और निष्पक्ष जांच के आदेश दिए।
सिर्फ प्रशासनिक कार्रवाई ही नहीं, बल्कि मानवीय संवेदनशीलता का भी परिचय देते हुए उन्होंने—
बुजुर्ग को ताम्रपत्र पुनः सम्मानपूर्वक लौटाया
खुद अपने हाथों से पानी पिलाकर उन्हें सांत्वना दी
बड़ा सवाल…
क्या एक लोकतंत्र सेनानी को न्याय के लिए इस हद तक मजबूर होना पड़ेगा?
क्या सत्ता के स्थानीय चेहरे आम लोगों पर भारी पड़ रहे हैं?
अब निगाहें प्रशासन की जांच और कार्रवाई पर टिकी हैं।
यह मामला सिर्फ एक बुजुर्ग की पीड़ा नहीं, बल्कि सिस्टम पर उठते गंभीर सवालों की कहानी बन चुका है।