प्रशासन सख्त—3 दिन में मांगा जवाब, जिम्मेदारों पर गिरेगी गाज
सेवाजोहार (डिंडोरी):- जिले की बरगा जलाशय लघु सिंचाई परियोजना एक बड़े प्रशासनिक सवाल के केंद्र में आ गई है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि योजना के क्रियान्वयन में गंभीर लापरवाही और वित्तीय अनियमितताओं के चलते करोड़ों रुपये व्यर्थ खर्च हो गए, जबकि अपेक्षित लाभ जमीनी स्तर पर नजर नहीं आया।
कलेक्टर कार्यालय (भू-अर्जन शाखा) द्वारा जारी निर्देशों में जल संसाधन विभाग के कार्यपालन यंत्री एस.के. शर्मा की भूमिका संदेह के घेरे में पाई गई है। अभिलेखों के अनुसार वर्ष 2004 में स्वीकृत इस परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी की गई थी और प्रभावित किसानों को मुआवजा भी वितरित किया जा चुका है। इसके बावजूद परियोजना का लाभ आम जनता तक नहीं पहुंच सका और अब इसे निरस्त करने का प्रस्ताव सामने आना गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।
प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाते हुए पूछा है कि यदि शुरुआत से ही परियोजना में तकनीकी और प्रशासनिक खामियां थीं, तो फिर गलत प्रस्ताव तैयार कर स्वीकृति क्यों ली गई? साथ ही यह भी स्पष्ट करने को कहा गया है कि करोड़ों रुपये खर्च होने के बाद आखिर ऐसी क्या स्थिति बनी कि परियोजना को बंद करने की नौबत आ गई।
कलेक्टर ने कार्यपालन यंत्री को 3 दिन के भीतर विस्तृत प्रतिवेदन प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही पूरे प्रकरण में शामिल अधिकारियों की भूमिका, उनकी जिम्मेदारी और अब तक की गई या प्रस्तावित कार्रवाई का स्पष्ट विवरण भी मांगा गया है।
प्रशासन ने साफ संकेत दे दिए हैं कि यदि जवाब संतोषजनक नहीं मिला, तो जिम्मेदारों के खिलाफ कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई तय है। इस मामले को उच्च प्राथमिकता में रखते हुए जांच तेज कर दी गई है।
बरगा जलाशय परियोजना में उजागर हुई इस लापरवाही ने न सिर्फ सरकारी योजनाओं की पारदर्शिता पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि आम जनता के पैसे की सुरक्षा को लेकर भी गंभीर चिंता पैदा कर दी है। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि दोषियों पर कब और कितनी सख्त कार्रवाई होती है।