सेवाजोहार (डिंडोरी/शहपुरा):- गंगा दशहरा के अवसर पर मध्यप्रदेश शासन के निर्देश पर प्रदेशभर में जल गंगा संवर्धन एवं जल संचय कार्यक्रम आयोजित किए गए। शासन का उद्देश्य जल स्रोतों का संरक्षण, नदियों की स्वच्छता और जल संरचनाओं के प्रति जनजागरूकता बढ़ाना बताया गया, लेकिन डिंडोरी जिले की शहपुरा तहसील अंतर्गत ग्राम पंचायत मालपुर स्थित प्रसिद्ध कन्हैया संगम नर्मदा तट पर आयोजित कार्यक्रम केवल औपचारिकता बनकर रह गया। स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं ने आरोप लगाया कि प्रशासन ने जमीनी समस्याओं को नजरअंदाज कर सिर्फ फोटो खिंचवाने तक कार्यक्रम सीमित रखा।
मालपुर का कन्हैया संगम नर्मदा तट जिले के प्रमुख धार्मिक एवं आस्था केंद्रों में शामिल है। यहां प्रतिवर्ष मकर संक्रांति पर 10 दिवसीय विशाल मेले का आयोजन होता है, जिसमें डिंडोरी और उमरिया जिले सहित दूर-दराज क्षेत्रों से हजारों श्रद्धालु पहुंचते हैं। नर्मदा जन्मोत्सव, पूजन, स्नान और विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों के कारण यह घाट वर्षभर श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बना रहता है।
इसके बावजूद वर्तमान में घाट की स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है। स्थानीय नागरिकों के अनुसार घाट का प्रमुख हिस्सा तेजी से सूख रहा है। घाट के पास बने रपटा पुल में लगाए गए गेट या तो टूट चुके हैं या पूरी तरह गायब हो गए हैं। गेट खराब होने के कारण पानी का ठहराव नहीं हो पा रहा और नर्मदा का जल तेजी से बहकर आगे निकल जाता है। इससे घाट का जलस्तर लगातार घट रहा है। जहां कभी श्रद्धालु सहज रूप से स्नान और धार्मिक कार्य करते थे, वहां अब पत्थर, रेत और मलवा नजर आने लगा है।
ग्रामीणों का कहना है कि इस समस्या को लेकर कई बार स्थानीय जनप्रतिनिधियों, स्थानीय प्रशासन, प्रभारी मंत्री और प्रदेश के उपमुख्यमंत्री तक ज्ञापन सौंपे गए, लेकिन हर बार केवल आश्वासन ही मिले। क्षेत्रीय ग्रामीणों में नाराजगी है कि नर्मदा तट संरक्षण के नाम पर केवल आयोजन किए जाते हैं, जबकि स्थायी समाधान की दिशा में कोई ठोस पहल नहीं की गई।
जल गंगा संवर्धन कार्यक्रम में नहीं दिखी जनभागीदारी
सोमवार को आयोजित जल गंगा संवर्धन कार्यक्रम में अपेक्षित जनसहभागिता भी देखने को नहीं मिली। कार्यक्रम स्थल पर अधिकांश कुर्सियां खाली रहीं। ग्रामीणों के मुताबिक स्थानीय लोगों और कई जनप्रतिनिधियों ने कार्यक्रम से दूरी बनाए रखी। कुछ विभागों को छोड़ अधिकांश अधिकारी-कर्मचारी भी मौके पर नहीं पहुंचे। ऐसे में शासन के महत्वाकांक्षी अभियान की गंभीरता पर सवाल उठने लगे हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि प्रशासन वास्तव में जल संरक्षण को लेकर गंभीर होता तो सबसे पहले घाट की सफाई, गाद निकासी, टूटे गेटों की मरम्मत और जल संचय की स्थायी व्यवस्था पर काम किया जाता। लेकिन वर्षों से उपेक्षित पड़े इस घाट की स्थिति में कोई सुधार नहीं हो सका।
धार्मिक आस्था पर पड़ रहा असर
मालपुर नर्मदा तट केवल एक घाट नहीं बल्कि हजारों लोगों की धार्मिक आस्था का केंद्र है। यहां दूर-दूर से श्रद्धालु पूजा-पाठ, स्नान, पिंडदान और अन्य धार्मिक अनुष्ठानों के लिए पहुंचते हैं। लेकिन घाट में पर्याप्त जल नहीं होने से श्रद्धालुओं को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते आवश्यक कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले समय में यह ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व का घाट अपनी पहचान खो सकता है।
ग्रामीणों और श्रद्धालुओं ने शासन-प्रशासन से मांग की है कि मालपुर स्थित कन्हैया संगम नर्मदा तट के संरक्षण के लिए विशेष कार्ययोजना बनाई जाए। रपटा पुल के गेटों की मरम्मत, घाट की सफाई, गाद निकासी और स्थायी जल संचय व्यवस्था जल्द सुनिश्चित की जाए, ताकि मां नर्मदा के इस प्रमुख आस्था केंद्र की गरिमा और धार्मिक महत्व सुरक्षित रह सके।