सेवाजोहार (डिंडोरी):- भीषण गर्मी से तप रहे आदिवासी बाहुल्य डिंडोरी जिले में इन दिनों पेयजल संकट गहराता जा रहा है। जलस्तर तेजी से नीचे जा रहा है और गांव-गांव में पानी की समस्या विकराल रूप लेती दिखाई दे रही है। कहीं ग्रामीण जनसुनवाई में पहुंच रहे हैं तो कहीं सड़क पर उतरकर आंदोलन करने को मजबूर हैं। ऐसे कठिन हालातों के बीच डिंडोरी कलेक्टर अंजू पवन भदौरिया अपने अलग कार्यशैली और जमीनी सक्रियता को लेकर लगातार चर्चा में हैं।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देशों के पालन में कलेक्टर अंजू पवन भदौरिया ने जिले में पेयजल संकट से निपटने के लिए जिला स्तरीय कंट्रोल रूम गठित किया। अधिकारियों की जिम्मेदारियां तय कर हेल्पलाइन नंबर जारी किए गए, ताकि ग्रामीण सीधे अपनी समस्या प्रशासन तक पहुंचा सकें और उसका त्वरित निराकरण हो सके।
इसी बीच ग्राम पंचायत घुसिया के ढीमर टोला से एक गंभीर मामला सामने आया। यहां पिछले 8 से 10 दिनों से ग्रामीण पेयजल संकट से जूझ रहे थे। हालात इतने खराब हो चुके थे कि महिलाओं को अपनी जान जोखिम में डालकर सूखे कुएं में उतरकर पानी निकालना पड़ रहा था। कुएं की गहराई और फिसलन भरे हालात किसी बड़े हादसे को न्योता दे रहे थे।
जानकारी के अनुसार गांव में लगा सरकारी बोर कुछ दिनों से खराब पड़ा था, लेकिन पंचायत के जिम्मेदारों ने इसकी सूचना समय पर वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंचाना जरूरी नहीं समझा। सरपंच और सचिव की लापरवाही के कारण समस्या लगातार बढ़ती गई और ढीमर टोला के लोग बूंद-बूंद पानी के लिए परेशान होते रहे।
जब यह मामला जनसुनवाई के माध्यम से कलेक्टर अंजू पवन भदौरिया तक पहुंचा तो उन्होंने इंतजार नहीं किया। शुक्रवार को स्वयं ग्राम घुसिया के ढीमर टोला पहुंचीं और चिलचिलाती धूप में मौके पर खड़े रहकर खराब बोर को सुधरवाया। कई घंटों की मशक्कत के बाद जैसे ही बोर से तेज धार में पानी निकला, ग्रामीणों के चेहरे खुशी से खिल उठे।
कलेक्टर ने खुद कुएं में उतरकर पानी भरने वाली महिलाओं और ग्रामीणों को समझाइश दी कि वे दोबारा अपनी जान जोखिम में डालकर ऐसा कदम न उठाएं। उन्होंने ग्रामीणों को पानी पिलाया और भरोसा दिलाया कि प्रशासन उनकी समस्या के समाधान के लिए पूरी गंभीरता से काम कर रहा है।
कलेक्टर अंजू पवन भदौरिया की इस कार्यशैली की पूरे घुसिया गांव में जमकर सराहना हो रही है। ग्रामीणों का कहना है कि “ऐसे समय में जब कई अधिकारी एसी कमरों से बाहर निकलना पसंद नहीं करते, तब कलेक्टर खुद गांव पहुंचकर हमारी समस्या सुन रही हैं और समाधान करा रही हैं। यही असली प्रशासन है।”
डिंडोरी में पानी की समस्या भले अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुई हो, लेकिन घुसिया के ढीमर टोला में प्रशासन की सक्रियता ने यह संदेश जरूर दे दिया है कि संवेदनशील नेतृत्व हो तो कठिन हालातों में भी राहत की उम्मीद जिंदा रहती है।