सेवाजोहार (डिंडोरी):- डिंडौरी जिले के महाराजपुर स्थित पवित्र संगमघाट आज एक ऐतिहासिक और भावनात्मक क्षण का साक्षी बना, जब हाथों के बल मां नर्मदा की कठिन एवं अद्भुत परिक्रमा पर निकले धर्मपुरी महाराज यहां पहुंचे। जैसे ही उनके आगमन की खबर क्षेत्र में फैली, वैसे ही श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा। हर कोई बस एक झलक पाने को आतुर नजर आया।
धर्मपुरी महाराज की यह परिक्रमा साधना, तपस्या और अटूट आस्था का अद्भुत उदाहरण है। वे पैरों के बजाय हाथों के बल चलते हुए मां नर्मदा की परिक्रमा कर रहे हैं, जो न केवल शारीरिक रूप से अत्यंत कठिन है, बल्कि आध्यात्मिक रूप से भी अत्यधिक अनुशासन और समर्पण की मांग करती है। उनकी इस तपस्या को देखने और उनसे आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए दूर-दूर से श्रद्धालु महाराजपुर संगमघाट पहुंचे।
महाराज पुरवा गांव से संगमघाट (महाराजपुर) पहुंचने के दौरान जगह-जगह ग्रामीणों और भक्तों ने उनका भव्य स्वागत किया। लोगों ने पुष्पवर्षा कर उनका अभिनंदन किया और “नर्मदे हर” के जयघोष से पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा। संगमघाट पर पहुंचते ही श्रद्धालुओं ने उनके चरणों में शीश नवाकर आशीर्वाद प्राप्त किया।
महाराजपुर का संगमघाट, जहां नदियों का संगम होता है, पहले से ही धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण स्थल माना जाता है। ऐसे में धर्मपुरी महाराज का यहां आगमन इस स्थल की आध्यात्मिक महत्ता को और भी बढ़ा गया। श्रद्धालुओं के अनुसार, यह पल उनके जीवन के लिए अत्यंत सौभाग्यशाली और प्रेरणादायक रहा।
धर्मपुरी महाराज आज रात्रि विश्राम भी संगमघाट पर ही करेंगे, जिससे श्रद्धालुओं को देर रात तक उनके दर्शन और सत्संग का लाभ मिलेगा। प्रशासन और स्थानीय व्यवस्था द्वारा भी श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की गई हैं।
धर्मपुरी महाराज की यह नर्मदा परिक्रमा न केवल एक धार्मिक यात्रा है, बल्कि यह समाज को आस्था, धैर्य और संकल्प की प्रेरणा देने वाली एक जीवंत मिसाल बनती जा रही है।
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