Monday, June 1, 2026

संसाधनों की कमी के बावजूद जल प्रबंधन के राष्ट्रीय शिखर तक पहुंचा डिंडोरी

कलेक्टर अंजू पवन भदौरिया और जिला पंचायत सीईओ दिव्यांशु चौधरी ने डिंडोरी को दिलाई राष्ट्रीय पहचान

सेवाजोहार (डिंडोरी):– मध्यप्रदेश के आदिवासी बाहुल्य और संसाधन-विहीन माने जाने वाले डिंडोरी जिले ने जल संरक्षण के क्षेत्र में ऐसा कीर्तिमान स्थापित किया है, जिसने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया है। भीषण गर्मी और जल संकट से जूझ रहे अनेक जिलों के बीच डिंडोरी ने “जलसंचय जनभागीदारी अभियान” के माध्यम से देश स्तर पर तीसरा तथा अपने जोन में प्रथम स्थान प्राप्त कर राष्ट्रीय पहचान बनाई है।

इस उपलब्धि के पीछे जिला कलेक्टर अंजू पवन भदौरिया और जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी दिव्यांशु चौधरी की समन्वित कार्यशैली, दूरदर्शी नेतृत्व एवं जनभागीदारी आधारित विकास मॉडल को प्रमुख कारण माना जा रहा है। दोनों अधिकारियों ने जल संरक्षण को केवल सरकारी योजना तक सीमित न रखकर जनआंदोलन का स्वरूप दिया, जिसके परिणामस्वरूप डिंडोरी आज देशभर में जल प्रबंधन के एक सफल मॉडल के रूप में स्थापित हुआ है।

डिंडोरी जिले की भौगोलिक परिस्थितियां सदैव चुनौतीपूर्ण रही हैं। जिले की मिट्टी में जल धारण क्षमता कम होने के कारण अधिकांश किसान वर्ष में एक ही फसल लेने को विवश रहे हैं। ऐसे में कलेक्टर अंजू पवन भदौरिया के मार्गदर्शन तथा जिला पंचायत सीईओ दिव्यांशु चौधरी के कुशल क्रियान्वयन के माध्यम से प्रशासन, पंचायतों, महिला स्व-सहायता समूहों, किसानों और आम नागरिकों को जोड़कर जल संरक्षण का व्यापक अभियान संचालित किया गया।

अभियान के अंतर्गत जिले में अब तक 7 लाख 78 हजार 655 जल संरक्षण एवं जल संवर्धन संरचनाओं पर कार्य किया जा चुका है। इनमें 8,990 डगवेल रिचार्ज, 2,257 हैंडपंप रिचार्ज, 16,719 रूफटॉप वाटर हार्वेस्टिंग, 1,72,543 कंटूर ट्रेंच, 16,312 गली प्लग, 1,922 गेबियन, 1,354 परकोलेशन टैंक, 10,012 खेत तालाब, 2,395 तालाब, 6,687 चेकडैम, 61,254 रिचार्ज पिट, 3,441 बोरी बंधान तथा 8,412 ड्रिप इरिगेशन संरचनाएं शामिल हैं।

अभियान की सबसे बड़ी विशेषता जनसहभागिता रही। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एसआरएलएम) की महिलाओं द्वारा 35 हजार पौधों पर मटका सिंचाई पद्धति अपनाई गई। महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा 2,797 ड्रिप इरिगेशन कार्य तथा स्वास्थ्य विभाग द्वारा 1,945 भवनों में सोक पिट निर्माण कराया गया। लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग ने 7,054 स्टैंड पोस्ट के समीप सोक पिट विकसित कर जल संरक्षण के प्रयासों को नई गति प्रदान की।

“एक बगिया मां के नाम” अभियान के तहत लगभग 3,500 फलदार पौधों का रोपण किया गया। वहीं ग्रामीणों ने परंपरागत ज्ञान और नवाचार का उपयोग करते हुए प्लास्टिक की अनुपयोगी बोतलों तथा मटकों के माध्यम से कम लागत वाली ड्रिप सिंचाई प्रणाली विकसित की, जो आज जिले में जल संरक्षण का अभिनव उदाहरण बन चुकी है।

गांव-गांव में जल चौपाल, कलश यात्राएं, नुक्कड़ नाटक और जनजागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए। सरकारी भवनों में रूफटॉप वाटर हार्वेस्टिंग एवं सोक पिट निर्माण को बढ़ावा दिया गया। स्कूलों और छात्रावासों में किचन गार्डन विकसित कर अपशिष्ट जल के पुनः उपयोग की व्यवस्था सुनिश्चित की गई।

प्रशासनिक विशेषज्ञों का मानना है कि कलेक्टर अंजू पवन भदौरिया की रणनीतिक सोच और जिला पंचायत सीईओ दिव्यांशु चौधरी की जमीनी स्तर पर प्रभावी मॉनिटरिंग एवं क्रियान्वयन क्षमता ने इस अभियान को अभूतपूर्व सफलता दिलाई है। दोनों अधिकारियों के नेतृत्व में डिंडोरी ने यह साबित कर दिया है कि सीमित संसाधनों के बावजूद यदि प्रशासन और जनता एक साथ कार्य करें तो बड़े से बड़ा परिवर्तन संभव है।

कभी पिछड़े और संसाधन-विहीन जिले के रूप में पहचाने जाने वाला डिंडोरी आज जल संरक्षण के क्षेत्र में देशभर के लिए प्रेरणा बन गया है। जलसंचय जनभागीदारी अभियान के माध्यम से कलेक्टर अंजू पवन भदौरिया और जिला पंचायत सीईओ दिव्यांशु चौधरी ने न केवल जिले की तस्वीर बदली है, बल्कि डिंडोरी का नाम राष्ट्रीय स्तर पर स्थापित कर उसे विकास और नवाचार की नई पहचान दिलाई है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Advertisement
Market Updates
Rashifal
Live Cricket Score
Weather Forecast
Weather Data Source: Wettervorhersage 14 tage
Latest news
अन्य खबरे