सेवाजोहार (मंडला):- मंडला शहर की वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. रेखा ताम्रकार ‘राज’ को साहित्य के क्षेत्र में उनके उल्लेखनीय योगदान और सृजनात्मक लेखन के लिए ‘विद्या वाचस्पति सारस्वत सम्मान’ से अलंकृत किया गया है। यह सम्मान उत्तर प्रदेश के आगरा स्थित ऋषि वैदिक विश्वविद्यालय, फतेहाबाद द्वारा प्रदान किया गया। इस सम्मान के साथ रेखा ताम्रकार ‘राज’ को ‘डॉ.’ की उपाधि भी प्राप्त हुई, जिससे साहित्यिक और सामाजिक जगत में हर्ष का वातावरण है।
डॉ. रेखा ताम्रकार ‘राज’ का साहित्य से जुड़ाव बचपन से ही रहा है। शुरुआती दिनों में वे छोटी-छोटी कविताएँ और कहानियाँ लिखा करती थीं। उनके लेखन को दिशा देने और उसे संजोकर रखने की प्रेरणा उनके बड़े भाई हंस कुमार ताम्रकार से मिली, जिन्हें वे आज भी अपना प्रमुख प्रेरणास्रोत मानती हैं।
उनकी रचनाएँ वर्षों से विभिन्न समाचार पत्रों, साहित्यिक पत्रिकाओं और पुस्तकों में प्रकाशित होती रही हैं। साहित्य साधना के लिए उन्हें अब तक काव्य श्री सम्मान, शब्दशक्ति सम्मान, शतकवीर सम्मान, महिला साहित्यकार सम्मान, साहित्य रत्न सम्मान और साहित्यश्री सम्मान सहित अनेक प्रतिष्ठित सम्मानों से नवाजा जा चुका है। देशभर के कई कवि सम्मेलनों में उनकी प्रभावशाली प्रस्तुतियों को भी भरपूर सराहना मिली है।
अब तक उनकी तीन पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं, जिनमें ‘भजन राज’ (भजन संकलन), ‘माँ की आवाज’ (लघुकथा संकलन) और ‘सृजन की फुलवारी’ (गीत एवं कविता संकलन) प्रमुख हैं। उनकी लेखनी की सबसे बड़ी विशेषता सरल, सहज और आम बोलचाल की भाषा है। वे गीत, ग़ज़ल, छंद, लघुकथा, कहानी, हास्य और आलेख जैसी विभिन्न साहित्यिक विधाओं में समान रूप से दक्ष हैं।
डॉ. रेखा ताम्रकार ‘राज’ जिले की कई साहित्यिक संस्थाओं से सक्रिय रूप से जुड़ी हुई हैं। वर्तमान में वे पिछले लगभग 10 वर्षों से राष्ट्रीय कवि संगम, मंडला की जिला अध्यक्ष एवं जिला समन्वयक के रूप में कार्यरत हैं। उनके नेतृत्व में नियमित ऑफलाइन और ऑनलाइन साहित्यिक गोष्ठियों के साथ-साथ अनेक रचनात्मक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। नवोदित साहित्यकारों को मंच प्रदान करना और उन्हें साहित्य की मुख्यधारा से जोड़ना उनका प्रमुख उद्देश्य रहा है।
‘विद्या वाचस्पति सारस्वत सम्मान’ प्राप्त कर डॉ. रेखा ताम्रकार ‘राज’ बनने पर उनके परिवार, शुभचिंतकों, साहित्यकारों और जिले के साहित्य प्रेमियों में खुशी का माहौल है। सभी ने उन्हें शुभकामनाएँ देते हुए इसे मंडला जिले के लिए गर्व का क्षण बताया है।