Friday, July 10, 2026

वर्षा ऋतु को लेकर प्रशासन अलर्ट: कलेक्टर अंजू पवन भदौरिया ने किया निरीक्षण

जल निकासी और साफ-सफाई के दिए निर्देश

सेवाजोहार (डिंडौरी):- वर्षा ऋतु के दौरान शहर में जलभराव और संभावित आपदा जैसी परिस्थितियों से निपटने के लिए जिला प्रशासन पूरी तरह सतर्क है। इसी क्रम में कलेक्टर अंजू पवन भदौरिया ने नगर के नर्मदा डैम घाट, शंकर घाट और इमली कुटी नाला क्षेत्र का निरीक्षण कर जल निकासी व्यवस्था, नालों की साफ-सफाई तथा पेयजल प्रबंधन की समीक्षा की।
निरीक्षण के दौरान कलेक्टर ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी नालों की नियमित सफाई सुनिश्चित की जाए, ताकि बारिश का पानी बिना किसी रुकावट के निकल सके और शहर में जलभराव की स्थिति उत्पन्न न हो। उन्होंने गंदे पानी को नर्मदा नदी में जाने से रोकने के लिए प्रभावी एवं स्थायी व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के भी निर्देश दिए।
कलेक्टर ने फिल्टर प्लांट का निरीक्षण कर अधिकारियों को निर्देशित किया कि वर्षा ऋतु के दौरान नागरिकों को स्वच्छ एवं निर्बाध पेयजल उपलब्ध कराने के लिए प्लांट का नियमित और सुचारु संचालन किया जाए। उन्होंने कहा कि पेयजल आपूर्ति प्रभावित न हो, इसके लिए सभी संबंधित विभाग आपसी समन्वय के साथ सतर्कता और जिम्मेदारी से कार्य करें।
सीवर योजना से नर्मदा को प्रदूषण से मिल रही राहत
नगर परिषद डिंडौरी क्षेत्र से होकर गुजरने वाली पवित्र नर्मदा नदी को प्रदूषण से बचाने के लिए जिला प्रशासन और नगर परिषद द्वारा सीवर योजना के माध्यम से महत्वपूर्ण कार्य किए जा रहे हैं। कलेक्टर अंजू पवन भदौरिया एवं नगर परिषद के प्रयासों से मध्यप्रदेश अर्बन डेवलपमेंट कंपनी द्वारा संचालित योजना के तहत शहर के आठ प्रमुख नालों को ट्रैप कर उनका दूषित जल सीवर ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) तक पहुंचाया जा रहा है, जहां उसका उपचार कर पुनः उपयोग किया जा रहा है।
जानकारी के अनुसार, योजना प्रारंभ होने से पहले नगर के आठ प्रमुख नालों से प्रतिदिन लगभग 10 लाख लीटर दूषित पानी सीधे नर्मदा नदी में मिलकर उसे प्रदूषित कर रहा था। इस समस्या के स्थायी समाधान के लिए नगरीय प्रशासन विभाग से लगभग 1.25 करोड़ रुपये की अतिरिक्त योजना स्वीकृत कराई गई, जिसके तहत सभी प्रमुख नालों को ट्रैप कर उनका पानी नदी में जाने से रोक दिया गया।
वर्तमान में प्रतिदिन लगभग 10 लाख लीटर दूषित जल का एसटीपी में उपचार किया जा रहा है। उपचारित जल का पुनः उपयोग किया जा रहा है, जिससे जल संरक्षण को बढ़ावा मिल रहा है। साथ ही उपचारित जल के निकासी स्थल पर वृक्षारोपण कर पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी सकारात्मक पहल की गई है।
जिला प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि वे नर्मदा नदी की स्वच्छता बनाए रखने में सहयोग करें तथा नदी और नालों में कचरा एवं अन्य अपशिष्ट पदार्थ न डालें।

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