सेवाजोहार (अमरकंटक) मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ की सीमा के समीप स्थित अमरेश्वर महादेव मंदिर (अमरेश्वर महालिंगम) आज पूरे क्षेत्र के प्रमुख धार्मिक स्थलों में शुमार है। प्राचीन ज्वालेश्वर महादेव मंदिर के निकट निर्मित यह भव्य मंदिर अपनी विशाल वास्तुकला, दिव्य वातावरण और अद्वितीय शिवलिंग के कारण श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। सावन मास और महाशिवरात्रि के दौरान यहां हजारों श्रद्धालु भगवान शिव के दर्शन और जलाभिषेक के लिए पहुंचते हैं।

51 टन वजनी 11 फीट ऊंचा महालिंगम बना आकर्षण का केंद्र
मंदिर का सबसे बड़ा आकर्षण यहां स्थापित विशाल अमरेश्वर महालिंगम है। लगभग 11 फीट ऊंचे और 51 टन वजनी इस शिवलिंग को मध्य प्रदेश के पवित्र तीर्थ ओंकारेश्वर से लाया गया है, जबकि इसकी विशाल जलहरी कटनी में तैयार की गई। श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए गर्भगृह में विशेष सीढ़ियों का निर्माण किया गया है, ताकि भक्त आसानी से शिवलिंग पर जलाभिषेक कर सकें।
एक ही परिसर में 12 ज्योतिर्लिंगों के दर्शन
सफेद संगमरमर से सुसज्जित मंदिर परिसर की एक और विशेषता यह है कि यहां मुख्य मंदिर के चारों ओर देश के 12 ज्योतिर्लिंगों की सुंदर प्रतिकृतियां स्थापित की गई हैं। श्रद्धालु एक ही स्थान पर सोमनाथ, महाकालेश्वर, ओंकारेश्वर, वैद्यनाथ सहित सभी ज्योतिर्लिंगों के दर्शन कर पुण्य लाभ प्राप्त करते हैं। मंदिर के भव्य प्रवेश द्वार पर स्थापित विशाल नंदी की प्रतिमा भी श्रद्धालुओं का ध्यान आकर्षित करती है।
अमरेश्वर नाम के पीछे की धार्मिक मान्यता
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार ‘अमरेश्वर’ का अर्थ है ‘अमर करने वाले प्रभु’ या ‘देवताओं के ईश्वर’। स्थानीय कथाओं के अनुसार इसी क्षेत्र में देवताओं ने भगवान शिव की आराधना कर अमरत्व का वरदान प्राप्त किया था। नर्मदा पुराण और शिव पुराण में भी मैकल पर्वतमाला के इस क्षेत्र का विशेष धार्मिक महत्व बताया गया है।
ज्वालेश्वर महादेव और जोहिला उद्गम के निकट स्थित है मंदिर
अमरेश्वर महादेव मंदिर, अमरकंटक के मुख्य नर्मदा उद्गम स्थल से लगभग 15 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यह मंदिर मध्य प्रदेश-छत्तीसगढ़ सीमा के पास स्थित प्राचीन ज्वालेश्वर महादेव मंदिर और जोहिला नदी के उद्गम स्थल के समीप होने के कारण श्रद्धालुओं के लिए विशेष महत्व रखता है।
श्रद्धालुओं में विशेष आस्था
स्थानीय मान्यता है कि जिस प्रकार काशी में बाबा विश्वनाथ और अयोध्या में श्रीरामलला के दर्शन के बिना यात्रा अधूरी मानी जाती है, उसी प्रकार अमरकंटक की धार्मिक यात्रा भी अमरेश्वर महालिंगम और ज्वालेश्वर महादेव के दर्शन के बिना पूर्ण नहीं मानी जाती। विशेष रूप से सावन मास और महाशिवरात्रि के अवसर पर यहां श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है और पूरा मंदिर परिसर शिवभक्ति के रंग में रंग जाता है।
(फोटो सोशल मीडिया से प्राप्त)